सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) ने एक अग्निवीर को बहाल करने का आदेश दिया है, जिसे नाबालिग होने के दौरान एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के लिए सेना से निकाल दिया गया था। न्यायाधिकरण ने कहा कि यह निष्कासन कानूनी रूप से गलत था।

  • सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) ने पूर्व-अग्निवीर अनस चौहान के निष्कासन आदेश को रद्द कर दिया।
  • सेना ने नाबालिग अवस्था के दौरान दर्ज FIR की जानकारी छिपाने के आरोप में उन्हें बर्खास्त किया था।
  • AFT ने फैसला सुनाया कि किशोरों के लिए उच्च न्यायालय द्वारा दी गई सुरक्षा सैन्य अधिकारियों पर बाध्यकारी है।

एक युवा रिक्रूट के लिए बड़ी कानूनी जीत में, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) ने एक अग्निवीर को बर्खास्त करने के भारतीय सेना के फैसले को पलट दिया है और उन्हें सभी लाभों के साथ तत्काल बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति को उसके नाबालिग होने के दौरान हुई कानूनी समस्याओं की जानकारी न देने के लिए दंडित नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब उसे न्यायिक सुरक्षा प्राप्त हो।

यह मामला अनस चौहान से संबंधित है, जिन्हें 2024-25 भर्ती रैली के दौरान अग्निवीर के रूप में चुना गया था। हालांकि, पुलिस सत्यापन के दौरान मेरठ में 3 अक्टूबर 2020 को दर्ज एक FIR का पता चला, जिसमें गांव के झगड़े में चौहान सहित 16 लोगों के नाम थे। इसके बाद, सेना ने आर्मी रूल्स, 1954 के नियम 13(3) के तहत 20 जनवरी 2026 को उन्हें बर्खास्त कर दिया, यह आरोप लगाते हुए कि उन्होंने नामांकन फॉर्म में जानकारी छिपाई थी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय अग्निपथ योजना की भर्ती पारदर्शिता और किशोरों के कानूनी अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है। यह सैन्य अनुशासन के कठोर नियमों और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000 के सुरक्षात्मक स्वभाव के बीच के टकराव को उजागर करता है। रिक्रूट के पक्ष में फैसला सुनाकर, AFT ने संकेत दिया है कि सैन्य प्रशासनिक कार्रवाइयों को उच्च न्यायालय के निर्देशों और नाबालिगों के लिए वैधानिक सुरक्षा के अनुरूप होना चाहिए।

चौहान के वकील ने 10 अप्रैल 2025 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को प्रस्तुत किया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि इस मामले को अग्निवीर चयन प्रक्रिया में अयोग्यता के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। AFT ने टिप्पणी की कि यदि सेना को लगता था कि 'जानकारी छिपाना' एक अलग अपराध है, तो उन्हें निष्कासन की कार्रवाई करने के बजाय उच्च न्यायालय के आदेश में संशोधन या स्पष्टीकरण मांगना चाहिए था।

"कानून के तहत एक नाबालिग को दी गई सुरक्षा पूर्ण है; किशोर रिकॉर्ड को सैन्य सेवा के लिए चरित्र दोष मानना एक कानूनी भूल है।"

न्यायाधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली उच्च कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि नाबालिग के रूप में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता को वयस्क होने पर रोजगार के अवसरों में बाधा नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने सेना की कार्रवाई को "कानून में अस्थिर" (unsustainable in law) करार दिया।

क्या आप जानते हैं?: किशोर न्याय अधिनियम, 2000 विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था कि कानून के साथ संघर्ष करने वाले बच्चों का पुनर्वास किया जाए, न कि उन्हें अपराधी बनाया जाए, ताकि उनका अतीत उनके पेशेवर भविष्य को प्रभावित न करे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: अग्निवीर को शुरू में क्यों बर्खास्त किया गया था?
उन्हें इसलिए बर्खास्त किया गया क्योंकि सेना ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने नामांकन फॉर्म में एक आपराधिक FIR की जानकारी छिपाई थी।

प्रश्न 2: AFT ने उन्हें बहाल करने का निर्णय किस आधार पर लिया?
AFT ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश और किशोर न्याय अधिनियम का सहारा लिया, जिसमें कहा गया कि नाबालिग के समय के कानूनी इतिहास का उपयोग उन्हें सेवा से अयोग्य घोषित करने के लिए नहीं किया जा सकता।