दिल्ली के एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी को नकली NIA अधिकारियों ने लाल किले विस्फोट में शामिल होने का डर दिखाकर 7 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा और उनकी जीवन भर की जमा पूंजी 30 लाख रुपये लूट ली।

  • ठगों ने खुद को NIA और ATS का अधिकारी बताकर दंपत्ति को डराया।
  • लाल किले के बम विस्फोट का हवाला देकर पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक रूप से तोड़ा गया।
  • 7 दिनों के 'डिजिटल अरेस्ट' के बाद 30 लाख रुपये की ठगी की गई।
  • पुलिस ने 12 लाख रुपये बरामद किए और एक आरोपी को गिरफ्तार किया।

नई दिल्ली: साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील घटनाओं का उपयोग मासूम लोगों को डराने के लिए कर रहे हैं। दिल्ली में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक 74 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी को फर्जी NIA अधिकारियों ने अपना शिकार बनाया। ठगों ने दंपत्ति को यह विश्वास दिला दिया कि वे लाल किले में हुए बम विस्फोट के वित्तपोषण (funding) में शामिल हैं, जिसके बाद उन्हें सात दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा गया।

घटना की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित को फोन आया और बताया गया कि उनकी बैंक खाता आतंकवादियों को पैसा भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया है। अपराधियों ने इतने पेशेवर तरीके से जाल बुना कि बुजुर्ग दंपत्ति को लगा कि वे वास्तव में कानून के घेरे में हैं। अपराधियों ने व्हाट्सएप पर ATS, NIA और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी नोटिस भी भेजे, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला साइबर अपराध के एक नए और खतरनाक ट्रेंड को दर्शाता है जिसे 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जाता है। अपराधी अब केवल बैंक विवरण नहीं मांगते, बल्कि वे पीड़ितों को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर देते हैं और उन्हें कानून का डर दिखाकर मानसिक रूप से पंगु बना देते हैं। यह दर्शाता है कि कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी खबरें अपराधियों के लिए 'पैनिक बटन' का काम कर रही हैं।

साइबर अपराधी अब केवल तकनीक का नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक डर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि पीड़ित किसी से मदद न मांग सके।

ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित था। अपराधियों ने दंपत्ति को एक 'गोपनीयता समझौते' (confidentiality agreement) पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया, जिसमें उन्होंने अपने बच्चों या किसी अन्य व्यक्ति को इस बारे में न बताने का वादा किया। इसके बाद, उन्हें आरबीआई (RBI) द्वारा अनुमोदित खाते में 'सत्यापन' के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। अंततः, दंपत्ति ने अपनी एफडी (FD) तोड़कर कुल 30 लाख रुपये ठगों के खातों में भेज दिए।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की और एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। जांच के दौरान पता चला कि पैसा एक ट्रैक्टर कंपनी, श्री बालाजी ट्रैक्टर के खाते के माध्यम से घुमाया गया था। पुलिस ने हरियाणा के फतेहाबाद से सुनील सिंगला नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने खाते का उपयोग साइबर धोखाधड़ी के लिए करने के बदले कमीशन लेने की बात स्वीकार की है।

Did You Know?: 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया भारत में अस्तित्व में नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी को हिरासत में नहीं रखती।

Frequently Asked Questions

1. क्या पुलिस या NIA वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार कर सकती है?
नहीं, कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती है। यदि कोई ऐसी कॉल आती है, तो यह पूरी तरह से धोखाधड़ी है।

2. अगर मेरे साथ ऐसी धोखाधड़ी हो जाए तो क्या करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।

विशेषतावास्तविक जांच एजेंसीसाइबर ठग
संपर्क का माध्यमआधिकारिक नोटिस/व्यक्तिगत उपस्थितिवीडियो कॉल/WhatsApp
डराने का तरीकाकानूनी प्रक्रिया का पालनआतंकवाद/बम विस्फोट का डर
पैसे की मांगकोर्ट/कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से'सत्यापन' के लिए तत्काल ट्रांसफर