सूरत के एक पूर्व एनआरआई को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर मुंबई पुलिस बनकर ठगों ने 2.96 करोड़ रुपये हड़प लिए। जालसाजों ने मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर पीड़ित को डराया और पैसे ऐंठे।

  • सूरत के 82 वर्षीय पूर्व एनआरआई प्रभाभाई पटेल से ₹2.96 करोड़ की धोखाधड़ी हुई।
  • ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर 'डिजिटल अरेस्ट' का नाटक किया।
  • मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर पीड़ित को डराया गया और पैसे ट्रांसफर कराए गए।
  • पीड़ित ने अपने अमेरिका में रह रहे बेटों से बात करने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

गुजरात के सूरत जिले के बार्दोली में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ 'डिजिटल अरेस्ट' नामक साइबर अपराध के जरिए एक बुजुर्ग व्यक्ति को जीवन भर की कमाई से हाथ धोना पड़ा। 82 वर्षीय प्रभाभाई पटेल, जो एक पूर्व एनआरआई हैं, मुंबई पुलिस बनकर आए जालसाजों के चंगुल में फंस गए। ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक काल्पनिक मामले में फंसाने की धमकी दी और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया।

घटनाक्रम के अनुसार, 8 अगस्त को पटेल को व्हाट्सएप पर एक संदेश प्राप्त हुआ जिसमें 'मुंबई पुलिस मुख्यालय' का उल्लेख था। इसके तुरंत बाद, एक महिला का फोन आया जिसने खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि पटेल के आधार कार्ड डेटा का उपयोग करके ₹122 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बैंक खाता खोला गया है। अपराधी ने पटेल को डराया कि उनका परिवार और घर निगरानी में है और यदि उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो उनके सभी बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर अपराधों में तेजी से वृद्धि हो रही है। अपराधी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की छवि का उपयोग करके लोगों के मन में मनोवैज्ञानिक भय पैदा करते हैं, जिससे पीड़ित सोचने-समझने की क्षमता खो देता है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे तकनीकी रूप से सक्षम लोग भी भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक हेरफेर का शिकार हो सकते हैं।

साइबर अपराधी अब केवल तकनीक का ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक डर का भी उपयोग कर रहे हैं, जो कानून व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को निशाना बनाता है।

ठगी का सिलसिला 11 अगस्त से 21 अगस्त के बीच चला, जब एक अन्य पुरुष कॉलर ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताया। उसने पटेल को चेतावनी दी कि जांच पूरी होने तक उन्हें 'जांच राशि' के रूप में धन की व्यवस्था करनी होगी। डर के मारे, पटेल ने विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹2.96 करोड़ स्थानांतरित कर दिए। यह मामला तब उजागर हुआ जब पटेल ने अपने बेटों से बात की, जो वर्तमान में अमेरिका में रहते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: डिजिटल अरेस्ट क्या है?

पिछले कुछ वर्षों में, 'डिजिटल अरेस्ट' एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड बनकर उभरा है। इसमें अपराधी पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बनकर पीड़ित को वीडियो कॉल करते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि वे कानूनी हिरासत में हैं। वे पीड़ित को कैमरा बंद न करने या किसी से बात न करने का निर्देश देते हैं, जिसे वे 'डिजिटल अरेस्ट' कहते हैं।

Did You Know?: पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही जांच के लिए पैसे की मांग करती है।

Frequently Asked Questions

1. यदि मुझे ऐसा कॉल आए तो मुझे क्या करना चाहिए?
तुरंत कॉल काट दें और स्थानीय पुलिस या साइबर सेल (1930) को सूचित करें।

2. क्या पुलिस वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी कर सकती है?
नहीं, कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी के लिए भौतिक उपस्थिति आवश्यक है, वीडियो कॉल पर नहीं।