मंगलुरु पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है जिसने पिछले ढाई दशकों से खुद को राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (NCIB) का अधिकारी बताकर देशभर में करोड़ों की धोखाधड़ी की।

  • केरल का निवासी सैम पीटर 25 वर्षों से फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को ठग रहा था।
  • आरोपी के खिलाफ कर्नाटक सहित बिहार, यूपी और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में 17 से अधिक मामले दर्ज हैं।
  • इंटरपोल ने 2001 में ही इसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था।

मंगलुरु के केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के जालसाज को दबोचा है जिसने कानून की आंखों में धूल झोंकने की कला में महारत हासिल कर ली थी। 64 वर्षीय सैम पीटर, जिसे श्याम पीटर और डैनी ताराकन जैसे कई नामों से जाना जाता है, ने पिछले 25 वर्षों से खुद को राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (NCIB) का अधिकारी या निदेशक बताकर मासूम लोगों को अपना शिकार बनाया।

पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी के अनुसार, आरोपी को 2019 में पहले भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सितंबर 2023 में जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया था। उसकी तलाश में कई अदालतों ने उद्घोषणाएं जारी की थीं, लेकिन वह अपनी पहचान बदलने की क्षमता के कारण पुलिस की पकड़ से दूर रहा।

अपराध का तरीका और जालसाजी

सैम पीटर का तरीका बेहद शातिर था। वह उन लोगों को निशाना बनाता था जो वित्तीय विवादों, बैंक धोखाधड़ी या टैक्स चोरी के मामलों में फंसे होते थे। वह खुद को एक शक्तिशाली NCIB अधिकारी बताकर उन्हें डराता था और मामले को रफा-दफा करने के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूलता था। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए राहुल पीटर, राजेश रॉबिन्सन, और रॉय जैकब जैसे एक दर्जन से अधिक फर्जी नामों का इस्तेमाल किया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सैम पीटर जैसे अपराधियों का इतने लंबे समय तक सक्रिय रहना हमारी अंतर-राज्यीय पुलिस समन्वय प्रणालियों में गंभीर खामियों को उजागर करता है। एक व्यक्ति जिसने 2001 में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस का सामना किया, वह दशकों तक विभिन्न राज्यों में सक्रिय रहा, जो डिजिटल डेटाबेस के एकीकरण की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।

"पहचान की चोरी और सरकारी पदों का फर्जी इस्तेमाल केवल वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह राज्य की संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास पर हमला है।"

आरोपी के खिलाफ कर्नाटक के मंगलुरु, उडुपी, बेंगलुरु और चिक्काबल्लापुर के अलावा बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश में दर्जनों मामले दर्ज हैं। अकेले उल्लाल मामले में उसके खिलाफ 17 बार वारंट जारी किए गए थे।

क्या आप जानते हैं?: इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस कोई अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं है, बल्कि यह सदस्य देशों को सूचित करने का एक तरीका है कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर प्रत्यर्पित किया जाना चाहिए।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सैम पीटर ने खुद को किस विभाग का अधिकारी बताया था?
उत्तर: उसने खुद को राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (NCIB) का अधिकारी और निदेशक बताया था।

प्रश्न 2: वह कितने समय से धोखाधड़ी कर रहा था?
उत्तर: वह पिछले 25 वर्षों से विभिन्न राज्यों में ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।