KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती घोटाले की जांच में CID ने नए मोड़ ले लिए हैं। संदिग्ध लाभार्थियों से पूछताछ के दौरान कुछ उम्मीदवारों ने कथित तौर पर परीक्षा में धांधली और पैसे देने की बात स्वीकार की है।
- CID ने KPSC भर्ती घोटाले के संदिग्ध लाभार्थियों से पूछताछ शुरू की।
- कुछ उम्मीदवारों ने कथित तौर पर परीक्षा में धांधली और रिश्वत देने की बात स्वीकार की है।
- पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बिचौलिये बसवराज कन्नले हिरासत में हैं।
- जांच का दायरा अन्य भर्ती परीक्षाओं तक बढ़ने की संभावना है।
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती घोटाले में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने अपनी जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। जांच अधिकारियों ने अब उन कथित लाभार्थियों से पूछताछ करना शुरू कर दिया है, जिन्हें अनुचित साधनों के माध्यम से चयन प्राप्त करने का संदेह है।
सूत्रों के अनुसार, CID ने कई ऐसे उम्मीदवारों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें से कुछ ने कथित तौर पर परीक्षा में धांधली करने और इसके लिए भुगतान करने की बात स्वीकार की है। कुछ उम्मीदवार मामले में गवाह बनने के लिए भी तैयार हैं, जिससे जांच की दिशा बदल सकती है। हालांकि, CID के अधिकारी अभी भी इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
जांच के केंद्र में IAS अधिकारी और बिचौलिया
वर्तमान में, CID हिरासत में मौजूद KPSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक और IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार तथा कथित बिचौलिये बसवराज कन्नले से गहन पूछताछ कर रही है। पूछताछ के दौरान, गंगवार ने खुद को घोटाले से निर्दोष बताते हुए सारा दोष कन्नले पर मढ़ दिया है।
गंगवार का दावा है कि उनका उम्मीदवारों के साथ कोई सीधा संपर्क नहीं था और न ही उन्होंने किसी वित्तीय लेनदेन में भाग लिया। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनकी सहमति और अनुमोदन के बिना प्रश्न पत्र नहीं छापे गए थे। यह बयान उनके खिलाफ एक महत्वपूर्ण सबूत बन सकता है, क्योंकि अब CID यह जांच रही है कि प्रश्न पत्रों की चोरी और लीक की प्रक्रिया में उनकी भूमिका वास्तव में कितनी गहरी थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक भर्ती घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी संस्थानों की अखंडता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि एक उच्च पदस्थ IAS अधिकारी की संलिप्तता की पुष्टि होती है, तो यह पूरे प्रशासनिक ढांचे में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर कर सकता है।
भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव न केवल योग्य उम्मीदवारों के भविष्य को बर्बाद करता है, बल्कि शासन प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को भी खत्म कर देता है।
जांच दल अब कन्नले के घर से बरामद दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है। CID को संदेह है कि कन्नले केवल इस एक घोटाले तक सीमित नहीं था, बल्कि वह अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी शामिल रहा होगा। आने वाले दिनों में अन्य परीक्षाओं की जांच भी की जा सकती है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: KPSC घोटाला क्या है?
उत्तर: यह कर्नाटक लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में धांधली और भ्रष्टाचार का मामला है।
प्रश्न 2: वर्तमान में जांच की स्थिति क्या है?
उत्तर: CID संदिग्ध लाभार्थियों और मुख्य आरोपियों से पूछताछ कर रही है और साक्ष्य जुटा रही है।