बेंगलुरु दक्षिण पुलिस ने रामनगरा के शांतिलाल लेआउट में चल रहे एक जाली मुद्रा गिरोह का पर्दाफाश किया है, जहाँ ₹200 और ₹500 के नकली नोट छापे जा रहे थे।

  • शांतिलाल लेआउट में जाली मुद्रा गिरोह चलाने के आरोप में सात लोग गिरफ्तार।
  • पुलिस ने जालसाजी के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष रसायनों, कांच की शीटों और महंगे सफेद कागज जब्त किए।
  • इस ऑपरेशन में रामनगरा के एक मास्टरमाइंड के साथ अंतरराज्यीय नेटवर्क शामिल था।

वित्तीय अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में, बेंगलुरु दक्षिण जिले की इजूर पुलिस ने शांतिलाल लेआउट में एक निर्माणाधीन मकान से संचालित हो रहे जाली मुद्रा गिरोह का भंडाफोड़ किया है। रविवार को हुई इस छापेमारी में सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास ₹200 और ₹500 के नकली नोट बनाने की सामग्री बरामद हुई है।

गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान मकान मालिक संतोष (गेज्जेपुरा, मगदी तालुक), संपत, गोविंदराज, रेणुकाराज, राजेश, शिवराज और सतीश के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके से कागज, रसायन, कपड़े, कांच की शीट, टेबल और अन्य सामग्री जब्त की है, जिनका उपयोग नकली नोटों को असली जैसा दिखाने के लिए किया जा रहा था।

अपराध का तरीका (Modus Operandi)

बेंगलुरु दक्षिण एसपी रोहन जगदीश के अनुसार, इस गिरोह में स्थानीय लोगों के साथ-साथ राज्य के बाहर के लोग भी शामिल थे। रामनगरा तालुक के निवासी संपत को इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी पिछले 10 दिनों से इस निर्माणाधीन घर में नकली नोट तैयार कर रहे थे, जिन्हें बाद में उनके संपर्कों को सौंपा जाना था।

मकान मालिक संतोष की भूमिका काफी संदिग्ध थी। शुरुआत में, उसने संपत को कमीशन के बदले दो महीने के लिए घर का उपयोग करने की अनुमति दी थी। हालांकि, बाद में अधिक लालच में आकर संतोष खुद इस गिरोह में शामिल हो गया, जहाँ उसे उत्पादित जाली मुद्रा के मूल्य पर 7% कमीशन का वादा किया गया था।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि निर्माणाधीन संपत्तियों का इस तरह उपयोग यह दर्शाता है कि निगरानी की कमी के कारण ऐसी जगहें अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गई हैं। साथ ही, बाहरी राज्यों के लोगों की संलिप्तता यह संकेत देती है कि यह केवल एक स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा है जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना है।

उच्च गुणवत्ता वाले सफेद कागज पर रासायनिक कोटिंग का उपयोग यह दर्शाता है कि गिरोह आम जनता द्वारा उपयोग किए जाने वाले बुनियादी नकली नोट पहचान तरीकों को चकमा देने की कोशिश कर रहा था।

छापेमारी के दौरान, पुलिस ने सफेद कागज के 10 बंडल जब्त किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹5 लाख है। आरोपी कागज पर रासायनिक लेप लगाकर उन्हें मुद्रा नोटों के आकार में काट रहे थे। इन तैयार शीटों को फिर अन्य स्थानों पर भेजा जाता था, जहाँ अंतिम छपाई की जाती थी।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मुद्रा नोटों को पूरी तरह से कॉपी होने से बचाने के लिए इंटैग्लियो प्रिंटिंग और सुरक्षा धागों (Security Threads) का उपयोग करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: रामनगरा जाली मुद्रा गिरोह का मास्टरमाइंड कौन था?
उत्तर 1: रामनगरा तालुक का निवासी संपत इस ऑपरेशन का मुख्य मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

प्रश्न 2: पुलिस ने छापेमारी के दौरान क्या-क्या जब्त किया?
उत्तर 2: पुलिस ने ₹5 लाख मूल्य के सफेद कागज, रसायन, कांच की शीट और नोट काटने के उपकरण जब्त किए हैं।