पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें कर्मचारियों को 15 दिनों के भीतर ₹14,191 करोड़ के महंगाई भत्ते (DA) का भुगतान करने को कहा गया था। सरकार का तर्क है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान इतने कम समय में करना कानूनी रूप से संभव नहीं है।
- पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के 15 दिनों के भीतर ₹14,191 करोड़ के DA भुगतान के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
- सरकार का तर्क है कि बिना विधानसभा की मंजूरी और विधायी प्रक्रिया के संचित निधि (Consolidated Fund) से इतनी बड़ी राशि निकालना असंभव है।
- हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य सरकार 'अनुत्पादक' खर्चों पर रोक लगाए जब तक बकाया राशि का भुगतान न हो जाए।
पंजाब सरकार ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राज्य को 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) में तर्क दिया गया है कि ₹14,191 करोड़ की वित्तीय देनदारी को दो सप्ताह के भीतर पूरा करना 'कानूनी रूप से संभव नहीं' है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) द्वारा दायर इस याचिका में हाईकोर्ट के 3 अगस्त के फैसले और संभावित अवमानना कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है।
कानूनी और संवैधानिक बाधाएं
पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund) से बिना निर्धारित विधायी प्रक्रिया के धन नहीं निकाला जा सकता। याचिका के अनुसार, अनुच्छेद 205(1)(a) के तहत पूरक व्यय विवरण, अनुच्छेद 203(3) के तहत अनुदान की मांग, और अनुच्छेद 204 के तहत विनियोग अधिनियम (Appropriation Act) की आवश्यकता होती है। इन सभी प्रक्रियाओं के लिए राज्यपाल द्वारा विधानसभा का सत्र बुलाना अनिवार्य है, जो 15 दिनों की समय सीमा में संभव नहीं है।
इतनी बड़ी राशि का भुगतान बिना विधायी प्रक्रिया के करना न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह संवैधानिक ढांचे के खिलाफ भी है।
वित्तीय संकट की स्थिति
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पंजाब वर्तमान में गंभीर वित्तीय दबाव में है। सरकार ने याचिका में उल्लेख किया है कि राज्य के राजस्व प्राप्तियों का लगभग 51% हिस्सा वेतन और पेंशन पर खर्च होता है, जो अखिल भारतीय औसत (38%) से काफी अधिक है। ब्याज सहित कुल प्रतिबद्ध देनदारियां राजस्व का लगभग 82% हिस्सा खा रही हैं।
हाईकोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि राज्य सरकार बकाया राशि चुकाने तक 'अनुत्पादक' खर्चों से दूर रहे। हालांकि, सरकार का कहना है कि ₹14,191 करोड़ का भुगतान करना राज्य के पूरे तीन महीने के वेतन और पेंशन बिल के बराबर है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं और अन्य आवश्यक खर्चों पर बुरा असर पड़ सकता है।
तुलनात्मक विश्लेषण: राज्य बनाम केंद्र नियम
| विशेषता | पंजाब राज्य नियम | केंद्र सरकार नियम |
|---|---|---|
| DA निर्धारण | राज्य सरकार के विवेक पर | केंद्र द्वारा निर्धारित दर |
| वेतन संरचना | उच्च आधार वेतन (2.72 गुणा) | कम आधार वेतन (2.57 गुणा) |
| अखिल भारतीय सेवाएं | केंद्र की दर पर भुगतान | केंद्र की दर पर भुगतान |
Frequently Asked Questions
1. हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को क्या निर्देश दिया था?
हाईकोर्ट ने राज्य को 15 दिनों के भीतर लंबित DA/DR का भुगतान करने और चूक होने पर 6% साधारण ब्याज देने का आदेश दिया था।
2. कर्मचारी इस मामले में क्या कर रहे हैं?
कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दी है और वे हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।