दक्षिण बेंगलुरु के वजराहल्ली में एक 40 वर्षीय महिला ने अपनी चार महीने की जुड़वां बेटियों को कथित तौर पर डुबोकर मार डाला और फिर खुद को फांसी लगाने का प्रयास किया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
- बेंगलुरु के वजराहल्ली में 40 वर्षीय महिला ने अपनी चार महीने की जुड़वां बेटियों की हत्या की।
- पीड़ित महिला ने खुद को फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, जिसे बचा लिया गया।
- डॉक्टरों के अनुसार, यह मामला प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) से जुड़ा हो सकता है।
- पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत मामला दर्ज किया है।
दक्षिण बेंगलुरु के थलगट्टपुरा क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद और विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है। वजराहल्ली के बीसीसीएचएस लेआउट में रहने वाली एक 40 वर्षीय महिला, उमदेवी, पर अपनी ही चार महीने की जुड़वां बेटियों को कथित तौर पर डुबोकर मारने का आरोप है। घटना के बाद महिला ने स्वयं भी आत्महत्या करने का प्रयास किया, लेकिन समय रहते उसे बचा लिया गया।
घटना का विवरण देते हुए पीड़िता के पति, 50 वर्षीय रामलिंगप्पा ने पुलिस को बताया कि मंगलवार दोपहर जब वह घर लौटे, तो उन्होंने कमरे को अंदर से बंद पाया। दरवाजा तोड़ने पर उन्होंने अपनी पत्नी को दुपट्टे से फांसी लगाने की कोशिश करते देखा। वहीं, कमरे के भीतर उनकी दोनों जुड़वां बेटियां मृत अवस्था में मिलीं। प्रारंभिक चिकित्सा जांच के अनुसार, बच्चों की मृत्यु डूबने के कारण हुई प्रतीत होती है।
मानसिक स्वास्थ्य और प्रसवोत्तर अवसाद
जांच में यह बात सामने आई है कि यह परिवार काफी संघर्ष कर रहा था। दंपति ने IVF उपचार के माध्यम से इन जुड़वां बेटियों को प्राप्त किया था, जिनका जन्म 5 मई, 2026 को क्लाउडनाइन अस्पताल में हुआ था। प्रसव के लगभग डेढ़ महीने बाद से ही उमदेवी के व्यवहार में बदलाव देखा जाने लगा था। वह बच्चों की देखभाल में अरुचि दिखाने लगी थीं और बार-बार उन्हें आश्रम भेजने की बात कह रही थीं।
परिवार ने उन्हें मानसिक उपचार के लिए NIMHANS (निमहंस) में दिखाया था, जहां डॉक्टरों ने संकेत दिया था कि उनका व्यवहार प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) और हार्मोनल असंतुलन के कारण हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी और प्रसवोत्तर अवसाद को गंभीरता से न लेना अक्सर ऐसी दुखद घटनाओं का कारण बनता है।
BozokMedia विश्लेषण: समाज और स्वास्थ्य प्रणाली की विफलता
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह समाज में प्रसवोत्तर मानसिक स्वास्थ्य (Postpartum Mental Health) के प्रति बढ़ती उपेक्षा को भी दर्शाती है। हालांकि परिवार ने चिकित्सकीय सहायता ली थी, लेकिन स्थिति का प्रबंधन करने में विफलता ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया।
Frequently Asked Questions
1. पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
थलगट्टपुरा पुलिस ने उमदेवी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है।
2. क्या महिला की स्थिति के बारे में पहले से जानकारी थी?
हाँ, परिवार ने उन्हें NIMHANS में दिखाया था, जहाँ डॉक्टरों ने उनके व्यवहार को हार्मोनल असंतुलन और अवसाद से जोड़ा था।