दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में गैंगस्टरों के बढ़ते प्रभाव और अधिकारियों की मिलीभगत ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार अब खतरनाक अपराधियों को दूसरे राज्यों में भेजने की योजना बना रही है।
- दिल्ली की जेलों में गैंगस्टरों द्वारा संगठित अपराध और वसूली का नेटवर्क चलाया जा रहा है।
- भ्रष्टाचार की जांच में जेल अधिकारियों सहित 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
- सरकार 'ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट' के तहत अंडरट्रायल गैंगस्टरों को दूसरे राज्यों में भेजने पर विचार कर रही है।
- जेल स्टाफ की कमी और प्रशिक्षण का अभाव मिलीभगत का मुख्य कारण है।
दिल्ली की जेलों के भीतर चल रहे अपराधों के काले साम्राज्य ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों और सरकार की नींद उड़ा दी है। हाल ही में मंडोली जेल में हुई हिंसक झड़प और एंटी-करप्शन ब्रांच द्वारा जेल अधिकारियों सहित 11 लोगों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि सलाखों के पीछे भी अपराध का जाल फैला हुआ है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में सक्रिय गैंगस्टरों जैसे नीरज बावाना, छोटा राजन और हशिम बाबा जैसे अपराधी अपने सिंडिकेट का संचालन जेल के भीतर से ही कर रहे हैं। यहाँ तक कि अनमोल बिश्नोई जैसे हाई-प्रोफाइल अपराधी भी कड़ी सुरक्षा के बावजूद जेल के भीतर नेटवर्क बनाने की कोशिश में रहते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि जेलों के भीतर गैंगस्टरों का नियंत्रण नहीं रोका गया, तो यह न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, बल्कि बाहर समाज में भी अपराध की दर को बढ़ा सकता है। जेलों का उपयोग अब केवल सजा काटने के लिए नहीं, बल्कि नए अपराधियों की भर्ती और वसूली के केंद्र के रूप में किया जा रहा है।
जेल के भीतर अपराध का पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) इतना मजबूत हो चुका है कि अपराधी आर्थिक तंगी और कानूनी मदद का लालच देकर नए कैदियों को अपने नेटवर्क में शामिल कर लेते हैं।
दिल्ली सरकार अब 'ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2025' के तहत खतरनाक अपराधियों और अंडरट्रायल गैंगस्टरों को दूसरे राज्यों की जेलों में स्थानांतरित करने की योजना बना रही है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य गैंग लीडरों को उनके स्थानीय नेटवर्क से अलग करना है ताकि वे गवाहों को डरा न सकें और मुकदमों में हस्तक्षेप न कर सकें।
पूर्व जेल अधीक्षक सुनील कुमार गुप्ता के अनुसार, जेल स्टाफ की कमी और विशेष प्रशिक्षण के अभाव के कारण अधिकारी इन खतरनाक अपराधियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं। कई बार स्टाफ सदस्य अपने परिवारों की सुरक्षा के डर से भी प्रभावशाली अपराधियों के सामने झुक जाते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: दिल्ली सरकार अपराधियों को दूसरे राज्यों में क्यों भेजना चाहती है?
उत्तर: ताकि गैंग लीडरों को उनके स्थानीय नेटवर्क, गवाहों और सहयोगियों से अलग किया जा सके और अपराध के संचालन को रोका जा सके।
प्रश्न 2: क्या जेल में मोबाइल फोन का उपयोग अभी भी एक समस्या है?
उत्तर: हाँ, जामर के बावजूद अपराधी तकनीकी खामियों और स्टाफ की मिलीभगत का उपयोग करके संचार बनाए रखते हैं।