कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विश्वजीत शेट्टी ने बेंगलुरु के जिम ट्रेनर विजय कुमार की हत्या के मामले में आरोपी एक रियल एस्टेट कारोबारी और एक वकील की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वह इन "गंदी चीजों" का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

  • कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस विश्वजीत शेट्टी ने जिम ट्रेनर हत्याकांड में जमानत याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग किया।
  • आरोपियों में एक बिल्डर और एक वकील शामिल हैं, जिन पर 25 लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या कराने का आरोप है।
  • जिम ट्रेनर विजय कुमार की हत्या कथित तौर पर बिल्डर की बेटी के साथ संबंधों के कारण की गई थी।

कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, जस्टिस विश्वजीत शेट्टी ने बेंगलुरु में एक जिम ट्रेनर की कॉन्ट्रैक्ट किलिंग (सुपारी देकर हत्या) के मामले में आरोपी एक रियल एस्टेट व्यवसायी और एक वकील द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया है। सोमवार को जब के. प्रसाद राव और वकील बी. लोकेश की अग्रिम जमानत याचिकाएं सुनवाई के लिए आईं, तो न्यायाधीश ने "मेरे सामने नहीं" कहते हुए मामले से खुद को हटा लिया। माननीय न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इन "गंदी चीजों का हिस्सा" नहीं बनना चाहते।

दोनों आरोपियों पर बेंगलुरु के 35 वर्षीय जिम ट्रेनर विजय कुमार की हत्या के लिए सुपारी देने का आरोप है। जून में पुलिस द्वारा इस सनसनीखेज हत्याकांड का पर्दाफाश किए जाने के बाद से ही दोनों आरोपी फरार चल रहे हैं। जिम ट्रेनर के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस. बालकृष्णन ने अदालत को बताया कि वह मामले की योग्यता के आधार पर अपनी दलीलें पेश करना चाहते हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने अभी तक दोनों आरोपियों के मामले को गुण-दोष के आधार पर नहीं सुना है। इससे पहले, बेंगलुरु ग्रामीण जिले की एक सत्र अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

25 लाख रुपये की 'सुपारी' और खूनी साजिश

जांच के अनुसार, विजय कुमार का क्षत-विक्षत शव 9 जून को बेंगलुरु के बाहरी इलाके बन्नेरघट्टा वन क्षेत्र में मिला था, जबकि वह 6 जून से लापता थे। पुलिस जांच से पता चला कि रियल एस्टेट कारोबारी की बेटी के साथ जिम ट्रेनर के कथित संबंधों को समाप्त करने के लिए यह पूरी साजिश रची गई थी। आरोपी वकील बी. लोकेश ने बिल्डर से 25 लाख रुपये की सुपारी ली थी और अपने एक मुवक्किल व स्थानीय गैंगस्टर श्रीराम के माध्यम से इस हत्याकांड को अंजाम दिलवाया।

सत्र न्यायालय ने 22 जुलाई को वकील की जमानत याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि जांच के दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि मृतक विजय कुमार, आरोपी नंबर 6 (बिल्डर) की बेटी को परेशान कर रहा था, जिसके कारण आरोपी नंबर 6 ने आरोपी नंबर 8 के माध्यम से आरोपी नंबर 1 तक पैसे पहुंचाकर जिम ट्रेनर की हत्या की सुपारी दी थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब कानून और न्याय की रक्षा करने वाले वकील ही अपराधियों के साथ मिलकर जघन्य अपराधों की साजिश रचने लगते हैं, तो इससे पूरी न्यायिक प्रणाली की साख पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। एक हाईकोर्ट जज का इस तरह खुद को मामले से अलग करना और इसे "गंदी चीजें" बताना, समाज में नैतिक पतन और न्यायपालिका के भीतर बढ़ रहे आक्रोश को दर्शाता है।

"कानून के रक्षकों का अपराधियों के साथ सांठगांठ करना न्याय प्रणाली के लिए सबसे बड़ा खतरा है। ऐसे मामलों में त्वरित और कठोरतम कार्रवाई ही जनता का विश्वास बहाल रख सकती है।"

जांच में हुए नए खुलासे और CID की एंट्री

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि 17 जून को चार आरोपियों की गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी वकील अपना फोन बंद कर फरार हो गया था। हालांकि, कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) से स्पष्ट हुआ कि वह हत्या से पहले, हत्या के दिन और हत्या के बाद भी मुख्य आरोपियों के लगातार संपर्क में था। अदालत ने कहा कि एक अभ्यास करने वाले वकील का हत्या के मामले में शामिल होना वकालत के पेशे के खिलाफ है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, कर्नाटक सरकार ने 29 जून को जांच को अपराध जांच विभाग (CID) को सौंप दिया था। यह कदम तब उठाया गया जब रियल एस्टेट कारोबारी की पत्नी ने सोशल मीडिया पर पुलिस पर झूठा फंसाने और अनुचित लाभ उठाने का आरोप लगाया था। हालांकि, सीआईडी की जांच में भी दोनों मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं।

आरोपी का नामकथित भूमिकावर्तमान स्थिति
के. प्रसाद राव (बिल्डर)बेटी के संबंधों से नाराज होकर 25 लाख रुपये की सुपारी दीफरार, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
बी. लोकेश (अधिवक्ता)सुपारी की रकम लेकर गैंगस्टर के जरिए हत्या की साजिश रचीफरार, हाईकोर्ट से झटका और जमानत खारिज
क्या आप जानते हैं?: कानूनी प्रक्रिया में 'रिक्यूजल' (Recusal) तब होता है जब कोई न्यायाधीश हितों के टकराव या निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वेच्छा से किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लेता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. हाईकोर्ट के जज ने इस मामले से खुद को क्यों अलग किया?
जस्टिस विश्वजीत शेट्टी ने नैतिक आधारों और मामले की संवेदनशील व गंभीर प्रकृति को देखते हुए खुद को सुनवाई से अलग कर लिया और कहा कि वह ऐसी "गंदी चीजों" का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

2. जिम ट्रेनर विजय कुमार की हत्या क्यों की गई थी?
विजय कुमार की हत्या मुख्य आरोपी (बिल्डर) की बेटी के साथ उनके कथित संबंधों को खत्म करने के लिए 25 लाख रुपये की सुपारी देकर कराई गई थी।