मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को निर्देश दिया है कि वह एक महिला के बैंक खाते को केवल विवादित राशि को छोड़कर अनफ्रीज करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध के संदेह में पूरे खाते को रोकना गलत है।

  • मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने SBI को महिला का बैंक खाता अनफ्रीज करने का आदेश दिया।
  • केवल विवादित ₹2.01 लाख की राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखने का निर्देश।
  • कोर्ट ने कहा कि केवल एक संदिग्ध लेनदेन के आधार पर पूरा खाता फ्रीज करना अनुचित है।
  • साइबर पुलिस को तीन महीने के भीतर कानूनी कार्रवाई पूरी करने का निर्देश।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को निर्देश दिया है कि वह एक महिला के बैंक खाते को अनफ्रीज करे। यह मामला तब उठा जब साइबर अपराध जांच एजेंसियों के निर्देश पर महिला का पूरा खाता ही फ्रीज कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी खाते में केवल एक विशिष्ट राशि संदिग्ध पाई जाती है, तो पूरे खाते को फ्रीज करना न्यायसंगत नहीं है।

न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि बैंक केवल उस विवादित राशि (लगभग ₹2.01 लाख) को सुरक्षित रख सकता है जिसे संदिग्ध माना गया है। शेष राशि का उपयोग करने की अनुमति याचिकाकर्ता को दी गई है। अदालत ने इस विवादित राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में रखने का आदेश दिया है, जिसे तीन महीने के भीतर न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही निकाला जा सकेगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय उन हजारों नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत है जो साइबर अपराध के जांच के दौरान अपने वैध धन तक पहुंच खो देते हैं। अक्सर जांच एजेंसियां पूरे खाते को फ्रीज कर देती हैं, जिससे व्यक्ति की दैनिक जीवन की वित्तीय गतिविधियां ठप हो जाती हैं। यह फैसला व्यक्तिगत वित्तीय स्वतंत्रता और जांच प्रक्रिया के बीच संतुलन स्थापित करता है।

"कानूनी प्रक्रिया का उद्देश्य अपराधी को पकड़ना है, न कि निर्दोष नागरिक की वित्तीय जीवनशैली को पूरी तरह से बाधित करना।"

याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि वह क्रिप्टो और वर्चुअल करेंसी के व्यापार में लगी हुई है। उसने बताया कि उसके SBI और ICICI बैंक के खाते बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक फ्रीज कर दिए गए थे। याचिकाकर्ता का दावा था कि उसने कभी भी किसी पुलिस स्टेशन से कोई नोटिस प्राप्त नहीं किया और संभव है कि किसी जालसाज ने उसके खाते के माध्यम से लेनदेन किया हो।

अदालत ने अपने फैसले में मैल्कम मुरईस बनाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पिछले मामले का हवाला दिया, जिसमें इसी तरह के विवाद पर निर्णय दिया गया था। अदालत ने साइबर पुलिस को निर्देश दिया है कि वे तीन महीने के भीतर CrPC की धारा 102 या अन्य संबंधित कानूनों के तहत उचित कार्रवाई करें। यदि इस अवधि में कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो FD में जमा राशि को भी निकालने की अनुमति दी जा सकती है।

Did You Know?: भारतीय कानून के तहत, पुलिस को किसी भी संपत्ति या खाते को फ्रीज करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, हालांकि साइबर अपराध के मामलों में यह प्रक्रिया अक्सर जटिल हो जाती है।

Frequently Asked Questions

1. क्या साइबर जांच के दौरान पूरा बैंक खाता फ्रीज किया जा सकता है?
न्यायालय के नवीनतम आदेश के अनुसार, केवल संदिग्ध राशि को फ्रीज किया जाना चाहिए, पूरे खाते को नहीं।

2. यदि पुलिस तीन महीने में कार्रवाई नहीं करती है तो क्या होगा?
कोर्ट के निर्देशानुसार, यदि पुलिस निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं करती है, तो जमा राशि को वापस निकालने की अनुमति दी जा सकती है।