पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मालवा नहर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। अदालत ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट पूरी होने तक किसी भी भूमि अधिग्रहण या मुआवजे पर रोक लगाने का आदेश दिया है।

  • हाईकोर्ट ने मालवा नहर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार नहीं हो जाती, तब तक किसानों को उनकी जमीन से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • परियोजना के तहत 149 किमी लंबी नहर बनाने का प्रस्ताव है, जिसका बजट लगभग ₹2,300 करोड़ है।
  • किसान और स्थानीय पंचायतें पानी की गुणवत्ता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।

पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी मालवा नहर परियोजना को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए भूमि अधिग्रहण की सभी प्रक्रियाओं को तब तक के लिए निलंबित कर दिया है, जब तक कि परियोजना की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट अंतिम रूप से तैयार नहीं हो जाती।

न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी और न्यायमूर्ति प्रविंद्र सिंह चौहान की खंडपीठ ने 25 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं या अन्य भूस्वामियों को उनकी भूमि से बेदखल नहीं किया जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक EIA रिपोर्ट पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस परियोजना के संबंध में कोई भी अवार्ड (मुआवजा) पारित नहीं किया जा सकता है।

परियोजना का विवरण और विवाद का कारण

मालवा नहर परियोजना का उद्देश्य दक्षिण-पश्चिमी पंजाब के उन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा प्रदान करना है जो वर्तमान में भूजल पर अत्यधिक निर्भर हैं। यह प्रस्तावित नहर लगभग 149 किलोमीटर लंबी होगी, जो हरिके हेडवर्क्स के पास से शुरू होकर मुक्तसर क्षेत्र की ओर जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹2,300 करोड़ है, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जून 2024 में की थी।

हालांकि, मुक्तसर, फरीदकोट और फिरोजपुर जिलों के 273 भूस्वामियों ने इस अधिग्रहण का विरोध किया है। मुख्य चिंता पानी की शुद्धता को लेकर है। अदालत के दौरान, जब बेंच ने पूछा कि क्या नहर का पानी पीने योग्य होगा, तो राज्य सरकार के अधिकारियों के पास इसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल भूमि अधिग्रहण का नहीं, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा और सरकारी पारदर्शिता का है। यदि सरकार बिना उचित प्रभाव आकलन के बड़े बुनियादी ढांचे का निर्माण करती है, तो इससे भविष्य में गंभीर पारिस्थितिक संकट पैदा हो सकता है।

पर्यावरण प्रभाव आकलन के बिना किसी भी बड़े जल संसाधन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना न केवल कानूनी रूप से जोखिम भरा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी हो सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पंजाब का मालवा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से कृषि प्रधान रहा है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में गिरते भूजल स्तर ने यहाँ के किसानों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। सरकार इस नहर के माध्यम से सतलुज और ब्यास नदियों के पानी को सुदूर क्षेत्रों तक पहुँचाना चाहती है, लेकिन प्रदूषण के मुद्दे ने इस योजना पर सवालिया निशान लगा दिया है।

Did You Know?: पंजाब का बुद्धा नाला लुधियाना के पास स्थित है और यह अत्यधिक प्रदूषित है, जिसका पानी सतलुज नदी के माध्यम से हरिके बैराज तक पहुँचता है।

Frequently Asked Questions

1. हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
अदालत ने कहा है कि जब तक EIA रिपोर्ट तैयार नहीं हो जाती, तब तक भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया नहीं की जा सकती।

2. किसान इस परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?
किसान मुख्य रूप से पानी की गुणवत्ता और बिना पर्यावरणीय अध्ययन के जमीन छीनने का विरोध कर रहे हैं।