सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मछली पकड़ने वाले जहाजों के आवागमन के लिए एक 'निर्दिष्ट चैनल' या आधिकारिक नेविगेशन कॉरिडोर बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया है ताकि मछुआरों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

  • सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को EEZ में मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए नियम बनाने का आदेश दिया है।
  • अदालत ने केंद्र और राज्य के बीच 'सहकारी संघवाद' (Co-operative Federalism) की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • मछुआरा पास के आवेदनों में भारी देरी पर कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है।

नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह 'मरीन फिशिंग रेगुलेशन रूल्स, 2020' के तहत मछली पकड़ने वाले जहाजों के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में जाने के लिए एक "निर्दिष्ट चैनल" या आधिकारिक नेविगेशन कॉरिडोर बनाने हेतु नियम तैयार करे। यह निर्णय उन मछुआरों के अधिकारों से जुड़ा है जो पर्स सीन (purse seine) जाल का उपयोग करके गहरे समुद्र में मछली पकड़ना चाहते हैं।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अरधे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों के पास अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में मछली पकड़ने को विनियमित करने की शक्ति है। जहाँ राज्य के पास अपने क्षेत्रीय जल (12 समुद्री मील तक) पर नियंत्रण है, वहीं केंद्र के पास EEZ में मछली पकड़ने के नियम बनाने का अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन दोनों कानूनों के बीच कोई संघर्ष नहीं है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय भारत के समुद्री अर्थव्यवस्था और मछुआरों की आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि नियमों में स्पष्टता नहीं होती, तो मछुआरे या तो राज्य के नियमों के कारण गहरे समुद्र में नहीं जा पाते, या फिर वे राज्य के क्षेत्रीय जल में अवैध रूप से मछली पकड़ने का जोखिम उठाते। एक 'निर्दिष्ट चैनल' बनाने से विवादों में कमी आएगी और समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदनों को समय पर संसाधित न करना, कानूनन एक 'अलिखित प्रतिबंध' लगाने के समान है, जो स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि 'ReALCRaft पोर्टल' पर 257 आवेदनों में से केवल 6 एक्सेस पास जारी किए गए हैं। लगभग 226 आवेदन तमिलनाडु सरकार द्वारा सत्यापन के लिए लंबित रखे गए हैं। कोर्ट ने इसे 'सहकारी संघवाद' की विफलता माना और राज्य को निर्देश दिया कि वह इन आवेदनों का जल्द से जल्द निपटान करे ताकि मछुआरों के संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(g)) सुरक्षित रहें।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तमिलनाडु ने वर्ष 2000 में ही तटीय क्षेत्रों में 'पेयर ट्रॉलिंग' और 'पर्स सीन' जाल के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था ताकि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सके। हाल ही में, केंद्र सरकार ने 'सतत मत्स्य पालन EEZ नियम, 2025' लागू किए हैं, जिससे अब राज्य और केंद्र दोनों के बीच समन्वय की आवश्यकता बढ़ गई है।

Did You Know?: विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) तट से 200 समुद्री मील तक फैला होता है, जहाँ देश को संसाधनों के दोहन का विशेष अधिकार होता है।

Frequently Asked Questions

1. सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को क्या करने का निर्देश दिया है?
कोर्ट ने तमिलनाडु को EEZ में जाने वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए एक आधिकारिक नेविगेशन कॉरिडोर या चैनल बनाने के नियम बनाने का निर्देश दिया है।

2. विवाद का मुख्य कारण क्या था?
विवाद यह था कि राज्य को डर था कि मछुआरे EEZ के नाम पर राज्य के क्षेत्रीय जल में अवैध रूप से जाल फैलाएंगे, जबकि मछुआरे थे कि उन्हें गहरे समुद्र में जाने से रोका जा रहा है।