बेंगलुरु के वजराहल्ली में एक 40 वर्षीय महिला ने अपनी 4 महीने की जुड़वां बेटियों की हत्या कर दी और फिर खुद को फांसी लगाने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, यह घटना प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) से जुड़ी हो सकती है।
- बेंगलुरु के वजराहल्ली में 40 वर्षीय महिला ने अपनी दो जुड़वां बेटियों की हत्या की।
- महिला ने खुदकुशी का प्रयास किया, जिसे उसके पति ने समय रहते बचा लिया।
- डॉक्टरों ने महिला के व्यवहार का कारण प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) को बताया है।
- पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के तहत मामला दर्ज किया है।
बेंगलुरु से एक बेहद दुखद और विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मां ने अपनी ही 4 महीने की दो मासूम जुड़वां बेटियों की जान ले ली। यह हृदयविदारक घटना शहर के वजराहल्ली इलाके की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला, जिसकी पहचान उमा देवी के रूप में हुई है, ने बच्चों की हत्या करने के बाद खुद को भी खत्म करने की कोशिश की।
घटना का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला का पति, रामलिंगप्पा, जो रियल एस्टेट व्यवसाय में है, ने इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। रामलिंगप्पा के अनुसार, उनका विवाह 2002 में हुआ था और लंबे समय तक संतान सुख न मिलने के कारण उन्होंने IVF उपचार का सहारा लिया था। इसी उपचार के सफल होने के बाद, 5 मई को उन्होंने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था।
व्यवहार में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य का संकट
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रसव के लगभग डेढ़ महीने बाद से ही उमा देवी के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखने लगे थे। वह बच्चों के प्रति उदासीन होने लगी थी और बार-बार उन्हें किसी आश्रम में छोड़ने की बात करती थी। परिवार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे राघवेन्द्र अस्पताल और निमहंस (NIMHANS) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दिखाया। डॉक्टरों ने संकेत दिया कि यह व्यवहार प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) और हार्मोनल असंतुलन का परिणाम हो सकता है।
प्रसव के बाद होने वाले गंभीर मानसिक विकार अक्सर परिवारों के लिए अनपेक्षित त्रासदी का कारण बन जाते हैं।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी और प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों को समय पर न पहचान पाना ऐसी घटनाओं को जन्म देता है। पुलिस ने बताया कि 1 सितंबर की दोपहर जब रामलिंगप्पा घर लौटे, तो उन्होंने कमरे को अंदर से बंद पाया। दरवाजा खोलने पर उन्होंने देखा कि उमा देवी ने घूंघट के सहारे फांसी लगाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने तुरंत उसे बचा लिया। हालांकि, उसी कमरे में उनकी दोनों मासूम बेटियां मृत पाई गईं।
जांच और कानूनी कार्रवाई
शंकर अस्पताल के डॉक्टरों के प्रारंभिक परीक्षण के अनुसार, बच्चों की मृत्यु डूबने के कारण हुई प्रतीत होती है। तालघट्टापुरा पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और मामले की गहन जांच कर रही है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस घटना का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
उत्तर: प्रारंभिक जांच और चिकित्सा इतिहास के अनुसार, प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) और हार्मोनल असंतुलन को इस व्यवहार का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
प्रश्न 2: पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
उत्तर: पुलिस ने मृत बच्चों के पिता की शिकायत पर आरोपी महिला के खिलाफ हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।