प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने NHAI टोल प्लाजा पर फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए करोड़ों की हेराफेरी मामले में देश के 14 राज्यों में छापेमारी की है। राजस्थान के सिरोही में एक बड़े व्यवसायी के घर पर भी गहन तलाशी ली गई है।
- NHAI टोल प्लाजा पर आधिकारिक सॉफ्टवेयर के बजाय अनधिकृत 'रॉन्ग सॉफ्टवेयर' का इस्तेमाल किया गया।
- फर्जी रसीदें जेनरेट कर टोल की राशि को आधिकारिक खातों से बाहर डायवर्ट किया गया।
- ED ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित 14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई की।
- सिरोही में दिवंगत व्यवसायी महेंद्र कुमार टांक के घर पर तलाशी ली गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के टोल प्लाजा पर कथित फर्जी टोल वसूली और धन के गबन के एक बड़े मामले में देशव्यापी कार्रवाई शुरू की। इस जांच का दायरा इतना व्यापक है कि एजेंसी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल सहित कुल 14 राज्यों में एक साथ छापेमारी की है।
इस कार्रवाई के तहत, ईडी की इलाहाबाद और लखनऊ जोनल टीमों ने राजस्थान के सिरोही जिले के अनादरा चौराहे स्थित व्यवसायी स्व. महेंद्र कुमार टांक के निवास पर तलाशी ली। तलाशी के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर CRPF के 6 जवानों को भी तैनात किया गया था। बताया जा रहा है कि महेंद्र कुमार टोल व्यवसाय से गहराई से जुड़े थे और उनके परिवार का पुराना रिकॉर्ड भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है।
कैसे काम करता था यह फर्जीवाड़ा?
जांच में एक बेहद चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। ईडी के सूत्रों के अनुसार, टोल प्लाजा पर आधिकारिक सॉफ्टवेयर के बजाय एक समानांतर 'रॉन्ग सॉफ्टवेयर' इंस्टॉल किया गया था। जैसे ही कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरता, यह अनधिकृत सॉफ्टवेयर एक फर्जी रसीद जनरेट कर देता था। इस प्रक्रिया के माध्यम से वसूली गई राशि को NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज करने के बजाय, अवैध रास्तों से डायवर्ट कर दिया जाता था।
फॉरेंसिक परीक्षण और NHAI के रिकॉर्ड की जांच ने अनधिकृत सॉफ्टवेयर के माध्यम से वित्तीय हेराफेरी की पुष्टि कर दी है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की सुरक्षा और राजस्व प्रणाली में सेंधमारी का एक गंभीर उदाहरण है। यदि टोलिंग सॉफ्टवेयर को हैक या रिप्लेस किया जा सकता है, तो यह देश के अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय प्रणालियों के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। यह कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि कैसे तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर सरकारी राजस्व की चोरी की जा रही है।
मामले की जड़ें 22 जनवरी, 2025 को दर्ज एफआईआर और मई 2025 में दर्ज ईसीआईआर (ECIR) से जुड़ी हैं। ईडी अब उन डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों की जांच कर रही है, जो इस कथित नेटवर्क के लाभार्थियों और अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) से जुड़े हो सकते हैं।
Historical Background
गौरतलब है कि सिरोही के इस व्यवसायी परिवार का नाम पहले भी 'आदर्श घोटाले' जैसे बड़े मामलों में जांच के दायरे में आ चुका है, जिससे इस वर्तमान मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ईडी ने किन राज्यों में छापेमारी की है?
उत्तर: ईडी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-NCR सहित 14 राज्यों में कार्रवाई की है।
प्रश्न 2: यह घोटाला किस तकनीक पर आधारित था?
उत्तर: यह घोटाला आधिकारिक सॉफ्टवेयर की जगह एक अवैध 'रॉन्ग सॉफ्टवेयर' का उपयोग करके फर्जी रसीदें बनाने पर आधारित था।