प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश के लगभग 100 NHAI से जुड़े टोल प्लाजा पर अवैध वसूली के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में पाया गया है कि बिना FASTag वाले वाहनों से अवैध रूप से पैसे वसूलने के लिए अनधिकृत ऐप्स का उपयोग किया जा रहा था।

  • ED ने 100 टोल प्लाजा पर अवैध ऐप के माध्यम से करोड़ों की वसूली का पता लगाया है।
  • 'Mobdata' और 'Any' नामक दो अनधिकृत ऐप्स का उपयोग किया जा रहा था।
  • उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली-NCR सहित कई राज्यों में छापेमारी की गई।
  • 1.03 करोड़ रुपये नकद और कई बैंक खाते जब्त किए गए।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि देश भर में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा अधिकृत लगभग 100 टोल प्लाजा पर अवैध टोल संग्रह किया जा रहा था। यह अवैध वसूली उन वाहनों से की जा रही थी जिनके पास FASTag नहीं था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले के लिए विशेष रूप से विकसित दो अनधिकृत ऐप्स का उपयोग किया जा रहा था, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है।

कैसे काम करता था यह अवैध नेटवर्क?

ED की जांच में सामने आया है कि 'Mobdata' और 'Any' नामक दो डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके टोल संग्रह किया जाता था। ये ऐप्स उन वाहनों को लक्षित करते थे जिनके विंडस्क्रीन पर FASTag नहीं लगा होता था। इन ऐप्स के माध्यम से न केवल पैसे वसूले जाते थे, बल्कि फर्जी रसीदें भी जारी की जाती थीं ताकि NHAI के आधिकारिक सिस्टम को चकमा दिया जा सके। डिजिटल उपकरणों के फोरेंसिक परीक्षण से पुष्टि हुई है कि यह प्रक्रिया करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन को छिपाने के लिए अपनाई गई थी।

डिजिटल उपकरणों के फोरेंसिक विश्लेषण से पता चला है कि अनधिकृत रसीदें करोड़ों रुपये के अवैध संग्रह को छिपाने के लिए बनाई गई थीं।

छापेमारी और जब्ती का विवरण

यह कार्रवाई 2 सितंबर को कई राज्यों में एक साथ की गई। ED की टीमों ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-NCR में कुल 14 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी ने 1.03 करोड़ रुपये नकद, विभिन्न बैंक दस्तावेज, अकाउंट बुक्स और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इसके अतिरिक्त, जांच के दायरे में आने वाले आठ बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह केवल एक वित्तीय धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और राजस्व प्रबंधन में एक गंभीर सेंध है। यदि अनधिकृत ऐप्स को NHAI के सिस्टम के समानांतर चलने दिया जाता है, तो यह भविष्य में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। यह मामला यह भी दर्शाता है कि कैसे तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर संगठित अपराधी सरकारी धन की चोरी कर रहे हैं।

यह मामला मूल रूप से जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR से शुरू हुआ था। उस FIR में 'अत्रैला शिव गुलाम' टोल प्लाजा सहित कई अन्य प्लाजा पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। ED ने अब इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर व्यापक जांच शुरू कर दी है।

Did You Know?: FASTag प्रणाली को पारदर्शिता बढ़ाने और टोल पर लगने वाले समय को कम करने के लिए लागू किया गया था, लेकिन इस घोटाले ने इसके सुरक्षा पहलुओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Frequently Asked Questions

1. ED ने किन राज्यों में छापेमारी की है?
ED ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-NCR में छापेमारी की है।

2. अवैध वसूली के लिए किन ऐप्स का उपयोग किया गया था?
जांच में 'Mobdata' और 'Any' नामक दो अनधिकृत ऐप्स का उपयोग किया गया था।