दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी और हिरासत के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए नियम होने के बावजूद, ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं।
- दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया है।
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी, तलाशी और हिरासत के लिए SOP की मांग की गई है।
- NHRC की 'एडवाइजरी 2.0' को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
- याचिकाकर्ता ने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी और हिरासत के लिए एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने हेतु आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
यह याचिका कानून के छात्र तारन चंदना द्वारा दायर की गई थी। याचिका में तर्क दिया गया कि जबकि दिल्ली पुलिस के पास महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की गिरफ्तारी के संबंध में मौजूदा आदेश (Standing Orders) हैं, लेकिन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मामले में पुलिस की नियमावली पूरी तरह से मौन है। इस 'कानूनी शून्यता' के कारण ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को अक्सर अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का नहीं है, बल्कि यह भारत के संविधान द्वारा गारंटीकृत गरिमा, समानता और गैर-भेदभाव के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। वर्तमान में, स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में पुलिस अधिकारियों द्वारा तलाशी और पूछताछ के दौरान ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान और उनकी शारीरिक अखंडता का सम्मान नहीं किया जाता है।
स्पष्ट SOP के बिना, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन कर सकती है।
याचिका में एक गंभीर घटना का उल्लेख किया गया है, जहाँ मई 2025 में तीन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उनकी पहचान और सहमति के बिना, एक पुरुष पुलिस अधिकारी द्वारा उनकी व्यक्तिगत तलाशी ली गई, जो कि उनके अधिकारों का खुला उल्लंघन था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मई 2026 में 'ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी 2.0' जारी की थी। इस एडवाइजरी में गिरफ्तारी, हिरासत, तलाशी, पूछताछ और कारावास के दौरान ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार के लिए व्यापक दिशा-निर्देशों की सिफारिश की गई थी। अदालत ने अधिकारियों को इस एडवाइजरी का पालन करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. अदालत ने किन संस्थाओं को नोटिस जारी किया है?
अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।
2. याचिकाकर्ता की मुख्य मांग क्या है?
याचिकाकर्ता मांग कर रहे हैं कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी और तलाशी के लिए एक विशेष SOP बनाई जाए ताकि उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके।