कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मानक (BIS) के अनुरूप न होने वाले खिलौने बेचने के मामले में फ्लिपकार्ट को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायाधीश ने कंपनी को अपनी गलती स्वीकार करने और भविष्य में सुधार करने की सलाह दी है।

  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने फ्लिपकार्ट द्वारा गैर-BIS मानक वाले खिलौने बेचने पर सख्त टिप्पणी की।
  • न्यायालय ने कहा कि विक्रेताओं की जांच करना कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) का हिस्सा होना चाहिए।
  • सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) द्वारा लगाए गए 5 लाख रुपये के जुर्माने को अदालत ने जायज माना।
  • अदालत ने फ्लिपकार्ट को अपनी शिकायत निवारण प्रणाली को और पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है।

बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart को उन खिलौनों की बिक्री के लिए कड़ी फटकार लगाई, जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानदंडों का पालन नहीं करते थे। यह मामला तब सामने आया जब फ्लिपकार्ट ने सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) द्वारा लगाए गए 5 लाख रुपये के जुर्माने को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने सुनवाई के दौरान कंपनी की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा, "हर कोई वेबसाइट पर यह विश्वास करके जाता है कि आपने उचित सावधानी बरती है और विक्रेता की जांच की है। यह विश्वास ही प्लेटफॉर्म की नींव है। ये खिलौने हैं जिन्हें बच्चे इस्तेमाल करेंगे, और शिशु उन्हें अपने मुंह में डाल सकते हैं। यदि आपका प्लास्टिक अच्छी गुणवत्ता का नहीं है, तो इसका प्रभाव बहुत बड़ा हो सकता है।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों की 'मध्यस्थ' (Intermediary) की भूमिका पर एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम करता है। जब कंपनियां एल्गोरिदम का उपयोग करके उत्पादों को 'Flipkart Assured' या 'Best Seller' के रूप में टैग करती हैं, तो वे केवल एक तटस्थ मंच नहीं रह जातीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

"विक्रेताओं के विवरणों का सत्यापन करना कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) का एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।" - न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज

फ्लिपकार्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम हुइलगोल ने तर्क दिया कि कंपनी ने कोई गलत प्रतिनिधित्व नहीं किया है और यह केवल BIS अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है, न कि अनुचित व्यापार व्यवहार। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि 5 लाख रुपये की राशि कंपनी के लिए बहुत छोटी है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की, "हर कोई गलती करता है। अपनी गलती स्वीकार करें और जीवन में आगे बढ़ें।"

यह विवाद 2023 में शुरू हुआ था जब प्राधिकरण ने ई-कॉमर्स साइटों पर घटिया खिलौनों की बिक्री का स्वतः संज्ञान लिया था। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत, प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली वस्तुएं सुरक्षा मानकों को पूरा करती हों।

Did You Know?: BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों के खिलौने जहरीले रसायनों से मुक्त हों, जो उनके विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Frequently Asked Questions

1. कोर्ट ने फ्लिपकार्ट को क्या निर्देश दिया है?
अदालत ने फ्लिपकार्ट को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि गैर-BIS अनुपालन वाले खिलौने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध या बेचे न जाएं और अपने संपर्क विवरण एवं शिकायत अधिकारी की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करे।

2. CCPA क्या है?
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) एक नियामक संस्था है जो उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करती है और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकती है।