केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों को ‘हैप्पीनेस और वेलनेस सेंटर’ नाम देने के निर्णय की सराहना की। जस्टिस देवांग रामाचंद्रन और जस्टिस बसंत बालाजी ने कहा कि यह नाम परिवर्तन मरीजों के अधिकारों में सुधार लाएगा।
- नाम बदलाव से कलंक हटाने की उम्मीद
- सरकार ने बुनियादी ढांचा और स्टाफ की कमी को प्राथमिकता दी
- कोर्ट ने तत्काल मानव अधिकार उल्लंघन को रोकने का निर्देश दिया
केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों को “हैप्पीनेस और वेलनेस सेंटर” नाम देने के प्रस्ताव का स्वागत किया। थिरुवनंतपुरम, त्रिशूर और कोज़ीकोड में हुए दौरे के दौरान जस्टिस देवांग रामाचंद्रन और जस्टिस बसंत बालाजी ने कहा कि यह परिवर्तन सामाजिक कलंक को कम करेगा और रोगियों के अधिकारों को सुदृढ़ करेगा।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इन केंद्रों को अक्सर नकारात्मक शब्दों से बुलाया जाता है, जिससे रोगियों और उनके परिवारों को अतिरिक्त सामाजिक बोझ उठाना पड़ता है। “हमें विश्वास है कि नाम परिवर्तन वह बदलाव उत्पन्न करेगा जो हम देखना चाहते हैं,” उन्होंने कहा।
अधिवक्ता जनरल ने बताया कि सरकार केंद्रों में बुनियादी ढांचा, स्टाफ की कमी और दवाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दों को ‘पूरी ईमानदारी’ से सुलझा रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम एक कल्याणकारी राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक कलंक दशकों से बना हुआ है। 2017 में मनोविकल्प अधिनियम (Mental Healthcare Act) के बावजूद, कई राज्य अभी भी पुराने शब्दजाल और अपर्याप्त सुविधाओं के कारण रोगियों को उचित देखभाल नहीं दे पाए हैं। केरल ने पहले भी “आशा केंद्र” जैसी पहलें चलाई थीं, परन्तु पर्याप्त परिवर्तन नहीं हो सका था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that renaming these facilities can shift public perception, attract better funding, and align Kerala with global best practices in mental health care.
“नाम में परिवर्तन केवल शब्द नहीं, बल्कि नीति और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक ठोस कदम है,” मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अनीता सिंह ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सभी मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों का नाम बदल दिया जाएगा?
उत्तर: हाँ, सरकार ने कहा है कि अगले दो वर्षों में सभी केंद्रों को “हैप्पीनेस और वेलनेस सेंटर” नाम दिया जाएगा।
प्रश्न 2: इस बदलाव से रोगियों को कौन‑सी नई सुविधाएँ मिलेंगी?
उत्तर: कोर्ट ने स्टाफ की संख्या बढ़ाने, सुरक्षा परिधि बनाने, दवाओं की निरंतर उपलब्धता और इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यवस्था जैसी मांगें रखी हैं।