सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक शिक्षा संस्थानों (TEIs) से वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट मांगने वाले NCTE के नोटिस को वैध ठहराया है। अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के पुराने आदेश को पलटते हुए शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही को अनिवार्य बताया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने NCTE के प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (PAR) संबंधी नोटिस को कानूनी रूप से वैध माना।
  • दिल्ली हाई कोर्ट के 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया गया जिसने इस नोटिस को अवैध बताया था।
  • अदालत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
  • शिक्षकों के प्रशिक्षण संस्थानों (TEIs) को अब 'कर्तव्य निभाने वाले' (duty-bearers) के रूप में पहचाना गया है।

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के उस सार्वजनिक नोटिस को बरकरार रखा है, जिसमें शिक्षक शिक्षा संस्थानों (TEIs) को वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (Performance Appraisal Report) जमा करने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अरधे की पीठ ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के मार्च 2023 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसने NCTE के इस कदम को मनमाना और अवैध करार दिया था।

हाई कोर्ट की गलती और सुप्रीम कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में त्रुटि की थी। अदालत ने कहा कि परिषद (Council) और उसकी कार्यकारी समिति (Executive Committee) के पास शिक्षक शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों से वार्षिक रिपोर्ट मांगने का पूर्ण अधिकार और क्षेत्राधिकार है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि केवल परिषद ही नोटिस जारी कर सकती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि नियामक संस्थाओं के पास अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से करने के लिए ऐसे सहायक उपाय करने की शक्ति होती है।

शिक्षा की गुणवत्ता और जवाबदेही

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एक बच्चे का विकास प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की भूमिका से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह निर्णय भारत में शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अदालत ने कहा कि चूंकि भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा स्वयं NCTE का प्रदर्शन ऑडिट किया जाता है, इसलिए यह स्वाभाविक है कि NCTE अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले संस्थानों से भी जवाबदेही मांगे।

शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, हमें संस्थानों को भी 'कर्तव्य निभाने वाले' के रूप में जोड़ना होगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संवैधानिक महत्व

यह निर्णय 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' (RTE Act) के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। कानून की धारा 23 के तहत, बच्चों के शिक्षा के अधिकार को प्रभावी बनाने के लिए योग्य शिक्षकों की आवश्यकता होती है, और NCTE को इस दिशा में 'शैक्षणिक प्राधिकरण' के रूप में मान्यता प्राप्त है। अदालत ने अपने पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा की जिम्मेदारी केवल सरकार या माता-पिता की नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण संस्थानों की भी है।

नया 'ड्यूटी-बेयरर' ढांचा

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अवधारणा पेश की है। पहले शिक्षा के अधिकार के लिए पांच 'कर्तव्य निभाने वाले' (duty-bearers) माने जाते थे: सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, पड़ोसी स्कूल, माता-पिता और शिक्षक। अब, इस सूची में दो और नाम जुड़ गए हैं: छठा: शिक्षक शिक्षा संस्थान (TEIs) और सातवां: NCTE। अदालत ने कहा कि इन निकायों के कर्तव्य सबसे महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे शिक्षा की नींव रखते हैं।

क्या आप जानते हैं?: भारत में शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को विनियमित करने वाली एकमात्र वैधानिक संस्था NCTE है।

Frequently Asked Questions

1. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस फैसले से अब सभी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को अपनी कार्यप्रणाली और प्रदर्शन की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से NCTE को सौंपनी होगी।

2. दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले क्या कहा था?
दिल्ली हाई कोर्ट ने NCTE के नोटिस को अवैध माना था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से पलट दिया है।