उधगमंडलम की ऐतिहासिक नीलगिरी लाइब्रेरी से 116 साल पुरानी दुर्लभ पुस्तक चोरी होने के आरोप में गिरफ्तार बेंगलुरु निवासी को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।

  • उधगमंडलम की 160 साल पुरानी नीलगिरी लाइब्रेरी से दुर्लभ पुस्तक गायब हुई थी।
  • बेंगलुरु के निवासी पर चोरी और इंस्टाग्राम के जरिए बिक्री का आरोप था।
  • न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने सबूतों की कमी के कारण आरोपी को बरी कर दिया।

उधगमंडलम स्थित ऐतिहासिक नीलगिरी लाइब्रेरी से एक अत्यंत दुर्लभ और 116 साल पुरानी पुस्तक की चोरी के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। उधगमंडलम की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने बेंगलुरु के एक निवासी को इस मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ चोरी साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश करने में विफल रहा।

मामले की शुरुआत अक्टूबर 2023 में हुई थी, जब ऊटी लिटरेचर फेस्ट (Ooty Literature Fest) के समापन के बाद लाइब्रेरी के पदाधिकारियों ने पुस्तकों का स्टॉक लिया। इस दौरान उन्हें पता चला कि कर्नल जॉन बिडल्फ द्वारा लिखित ऐतिहासिक पुस्तक, 'The Pirates of Malabar and An Englishwoman in India Two Hundred Years Ago', अपनी जगह से गायब है। यह पुस्तक न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि नीलगिरी के साहित्यिक इतिहास का एक अनमोल हिस्सा भी है।

जांच और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

लाइब्रेरी के पदाधिकारियों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद, नीलगिरि जिला पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि इस दुर्लभ पुस्तक को इंस्टाग्राम (Instagram) के माध्यम से बेचने का प्रयास किया जा रहा है। साइबर क्राइम सेल की मदद से पुलिस ने मोबाइल फोन के विवरणों को ट्रैक किया, जिससे संदिग्ध की पहचान हुई। इसके बाद पुलिस ने बेंगलुरु निवासी देबनाथ को गिरफ्तार किया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

वर्ष 2024 से उधगमंडलम की अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, 30 सितंबर 2025 को न्यायाधीश डी. रवि ने मामले की समीक्षा की और पाया कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कड़ी नहीं जुड़ी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के मामले ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और डिजिटल युग में कलाकृतियों की तस्करी के बढ़ते खतरों को रेखांकित करते हैं। दुर्लभ पुस्तकों की चोरी न केवल सांस्कृतिक नुकसान है, बल्कि यह सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है।

ऐतिहासिक दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए केवल भौतिक निगरानी ही नहीं, बल्कि डिजिटल ट्रैकिंग और सख्त कानून भी अनिवार्य हैं।
Did You Know?: नीलगिरी लाइब्रेरी 160 साल पुरानी है और यह दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक केंद्रों में से एक मानी जाती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: चोरी हुई पुस्तक का नाम क्या था?
उत्तर: चोरी हुई पुस्तक का नाम 'The Pirates of Malabar and An Englishwoman in India Two Hundred Years Ago' है, जिसे कर्नल जॉन बिडल्फ ने लिखा था।

प्रश्न 2: अदालत ने आरोपी को क्यों बरी किया?
उत्तर: अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव के कारण आरोपी को बरी करने का निर्णय लिया।