बेंगलुरु पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराध का पर्दाफाश किया है, जहाँ जालसाज वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम और फोटो का उपयोग करके लोगों को सोशल मीडिया पर निशाना बना रहे थे। इस मामले में राजस्थान के एक किशोर को पकड़ा गया है।
- जालसाजों ने वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाए थे।
- ठगी के लिए फर्नीचर बेचने जैसे फर्जी बहाने बनाए जाते थे।
- राजस्थान के एक किशोर को गिरफ्तार किया गया है और ₹2 लाख की नकदी बरामद हुई है।
- यह मामला एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
बेंगलुरु पुलिस ने एक बेहद शातिर साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो सोशल मीडिया पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान चुराकर लोगों को ठग रहा था। यह गिरोह IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) और IPS (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारियों के नाम और तस्वीरों का उपयोग करके फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बना रहा था, ताकि लोगों का विश्वास जीता जा सके।
जांच की शुरुआत तब हुई जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एम नारायण के नाम और फोटो का उपयोग करके एक फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया गया और उनके परिचितों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई। इस मामले में नारायण की शिकायत के बाद 16 मई को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। जांच में पता चला कि कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों से कम से कम 10 लोग इस जालसाजी का शिकार हो चुके हैं।
ठगी का तरीका: कैसे फंसते थे लोग?
पुलिस के अनुसार, अपराधी बहुत ही चतुर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। एक प्रमुख तरीका यह था कि वे एक फर्जी कहानी गढ़ते थे कि एक CRPF कमांडेंट का तबादला हो गया है और वह अपना फर्नीचर और घरेलू सामान भारी छूट पर बेचना चाहता है। जब लोग विश्वास कर लेते थे, तो उन्हें भुगतान करने के लिए राजी किया जाता था, लेकिन सामान कभी नहीं पहुंचता था।
सोशल मीडिया पर किसी भी अधिकारी की प्रोफाइल पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना अनिवार्य है।
बोजोकमीडिया विश्लेषण (BozokMedia analysis) से पता चलता है कि इस तरह के 'इम्पर्सनेशन फ्रॉड' (Impersonation Fraud) में अपराधी मनोवैज्ञानिक रूप से उच्च पदस्थ अधिकारियों की प्रतिष्ठा का लाभ उठाते हैं। पुलिस ने राजस्थान के कोटकुर्द गांव से एक किशोर को पकड़ा है, जिसने स्वीकार किया कि वह कई फर्जी प्रोफाइल बना रहा था।
Why This Matters
यह मामला केवल एक स्थानीय अपराध नहीं है, बल्कि यह देश में बढ़ते अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क की ओर इशारा करता है। पुलिस को संदेह है कि राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों में फैला एक बड़ा नेटवर्क इस गिरोह की मदद कर रहा था। पुलिस अब उन बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है जिनका उपयोग ठगी के पैसे प्राप्त करने के लिए किया गया था।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यदि मुझे किसी संदिग्ध प्रोफाइल से अनुरोध मिलता है तो क्या करना चाहिए?
उत्तर: तुरंत उस प्रोफाइल को रिपोर्ट करें और किसी भी वित्तीय लेनदेन से बचें। अधिकारी कभी भी सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्तिगत धन की मांग नहीं करते हैं।
प्रश्न 2: क्या पुलिस ने इस मामले में कोई बरामदगी की है?
उत्तर: हाँ, पुलिस ने आरोपी किशोर के पास से ₹2 लाख की नकदी बरामद की है।