कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक सरकारी अस्पताल की घोर लापरवाही के लिए राज्य सरकार को उत्तरदायी ठहराते हुए मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान दृष्टि खोने वाले व्यक्ति को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

  • कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सरकारी अस्पताल की लापरवाही के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
  • मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान संक्रमण के कारण एक व्यक्ति अपनी आंखों की रोशनी खो बैठा।
  • अदालत ने पीड़ित को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
  • अदालत ने कहा कि गरिमा के साथ जीने का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए एक व्यक्ति को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जो एक सरकारी अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद आंशिक रूप से दृष्टिहीन हो गया था। न्यायालय ने इस मामले में अस्पताल अधिकारियों और राज्य सरकार दोनों की घोर लापरवाही को स्वीकार किया है।

न्यायाधीश शम्पा सरकार और अर्जुन राय मुखर्जी की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि दृष्टि की हानि ने व्यक्ति को न केवल गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि उसके भविष्य की संभावनाओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'जीवन के अधिकार' में गरिमा के साथ जीने और अच्छे स्वास्थ्य का अधिकार शामिल है, और दृष्टि खोना जीवन की गुणवत्ता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी ढांचे की कमी और जवाबदेही के गंभीर संकट को उजागर करता है। जब सरकारी संस्थान सुरक्षा मानकों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

"राज्य को अस्पताल के कार्यों के लिए प्रतिनिधिक दायित्व (Vicarious Liability) वहन करना होगा, क्योंकि नागरिकों का स्वास्थ्य उसकी जिम्मेदारी है।"

मामले के विवरण के अनुसार, पीड़ित एक इलेक्ट्रीशियन है जो मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए गया था। रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी (RIO), कोलकाता के निदेशक की राय के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना ऑपरेशन के उपकरणों या समाधानों में सूक्ष्मजीवों के संदूषण या उपकरणों के दोषपूर्ण स्टरलाइजेशन के कारण हो सकती थी।

अदालत ने पाया कि अस्पताल के अपने मेडिकल बोर्ड ने ऑपरेशन थिएटर (OT) में सुधार के लिए कई सिफारिशें की थीं, जैसे कि वॉश बेसिन का स्थान बदलना और स्टाफ के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम। इसके बावजूद, अस्पताल ने बिना पर्याप्त बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षित कर्मचारियों के सर्जरी जारी रखी। अदालत ने इसे 'लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना कार्य' करार दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में चिकित्सा लापरवाही के मामलों में पिछले कुछ दशकों में न्यायिक सक्रियता बढ़ी है। ऐतिहासिक रूप से, 'विकेरियस लायबिलिटी' (प्रतिनिधिक दायित्व) का सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्य का पालन करते समय लापरवाही करता है, तो सरकार उसके कार्यों के लिए मुआवजे के लिए उत्तरदायी है।

Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि चिकित्सा लापरवाही के मामलों में 'कंसेंट' (सहमति) का अर्थ केवल सर्जरी की अनुमति देना नहीं है, बल्कि सर्जरी से जुड़े जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी देना भी है?

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अदालत ने मुआवजे की राशि कैसे निर्धारित की?
उत्तर: अदालत ने पीड़ित के इलाज के खर्च, भविष्य की आय की हानि और उसके परिवार के एकमात्र कमाने वाले होने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए 5 लाख रुपये तय किए।

प्रश्न 2: क्या राज्य सरकार इस मुआवजे के लिए जिम्मेदार है?
उत्तर: हाँ, अदालत ने कहा कि अस्पताल की लापरवाही के लिए राज्य सरकार 'विकेरियस लायबिलिटी' के तहत उत्तरदायी है।