दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान लगे फेशियल रिकग्निशन सिस्टम ने एक ऐसे अपराधी की पहचान की, जो कथित तौर पर तिहाड़ जेल में बंद था। यह व्यक्ति लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा गिरोह का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है।
- जंतर-मंतर पर लगे फेशियल रिकग्निशन सिस्टम ने योगेश उर्फ राजू की पहचान की।
- जांच में पाया गया कि अपराधी के पहचान होने के समय वह तिहाड़ जेल में बंद था।
- योगेश लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा गिरोह से जुड़ा एक कुख्यात अपराधी है।
- सिस्टम ने कुल 25 ऐसे अपराधियों को फ्लैग किया है जो पहले से जेल में हैं।
एक चौंकाने वाले खुलासे में, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान तैनात फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर ने एक ऐसे व्यक्ति की पहचान की है, जिसका उस समय जेल में होना अनिवार्य था। पुलिस और जेल रिकॉर्ड के अनुसार, 27 वर्षीय योगेश उर्फ राजू, जो लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा गिरोह का करीबी सहयोगी माना जाता है, को 25 जुलाई को दोपहर 4:24 बजे जंतर-मंतर पर 'स्पॉटेड' किया गया था।
हालांकि, जब इस मामले की गहराई से जांच की गई, तो एक बड़ी विसंगति सामने आई। जेल रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि योगेश उस समय तिहाड़ जेल में अपनी हिरासत में था। वह पिछले साल, यानी नवंबर 2024 से विभिन्न मामलों में जेल में बंद था। यह घटना सुरक्षा प्रणालियों की सटीकता और अपराधियों की पहचान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अपराध का इतिहास और पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश के बदाऊं का निवासी योगेश कोई साधारण अपराधी नहीं है। वह दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 (GK-1) में जिम मालिक नादिर शाह की हत्या के मामले में मुख्य आरोपियों में से एक है। नादिर शाह, जो एक अफगान नागरिक थे, की हत्या 12 सितंबर 2024 को उनके जिम के बाहर गोली मारकर कर दी गई थी। पुलिस ने योगेश को मथुरा हाईवे पर एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था, जिसमें वह पैर में गोली लगने से घायल हो गया था।
योगेश पर हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों की पांच प्राथमिकी (FIR) दर्ज हैं। वह पहले चेन्नू पहलवान के गिरोह के साथ काम करता था, लेकिन बाद में पैसे के विवाद के कारण वह 2023 में हाशिम बाबा के गिरोह में शामिल हो गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला न केवल तकनीक की सीमाओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे हाई-प्रोफाइल अपराधी गिरोहों के नेटवर्क के माध्यम से कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम द्वारा एक ऐसे व्यक्ति को फ्लैग करना जो जेल में है, डेटा की सटीकता या सिस्टम के 'हिट एंड मिस' स्वभाव पर सवाल उठाता है।
तकनीकी त्रुटि या डेटा मिसमैच सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर जब मामला संगठित अपराध से जुड़ा हो।
जांच में यह भी पता चला है कि बिश्नोई गिरोह ने नादिर शाह को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वह एक दुबई स्थित व्यवसायी के साथ काम कर रहा था, जिससे गिरोह ने 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: योगेश उर्फ राजू पर कौन से मुख्य मामले दर्ज हैं?
उत्तर: योगेश पर दिल्ली के GK-1 में नादिर शाह की हत्या और उत्तर प्रदेश में हत्या के अन्य मामले शामिल हैं।
प्रश्न 2: जंतर-मंतर पर कितनी बार अपराधी देखे गए?
उत्तर: सिस्टम ने कम से कम 25 ऐसे व्यक्तियों को फ्लैग किया जो पहले से ही विभिन्न अपराधों के लिए जेल में बंद थे।