कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 18 नवंबर, 2025 की राज्य सरकार की अधिसूचना को निरस्त कर दिया, जिसके तहत सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस को पुलिस अधिनियम, 1963 के तहत बाहरी आदेश जारी करने का अधिकार मिला था। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि केवल पुलिस कमिश्नर, जिला मजिस्ट्रेट और विशेष रूप से सक्षम उपविभागीय मजिस्ट्रेट ही इस शक्ति के योग्य हैं।

  • अधिसूचना को उच्च न्यायालय ने निरस्त किया।
  • सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस को बाहरी आदेश देने का अधिकार नहीं है।
  • कानूनी प्रावधानों के अनुसार केवल कुछ पदों को यह शक्ति मिलती है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 18 नवंबर, 2025 को जारी राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिससे सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) को पुलिस अधिनियम, 1963 के तहत बाहरी आदेश जारी करने का अधिकार नहीं मिलता। न्यायाधीश सचिन शंकर मगदुम ने इस निर्णय में कहा कि “SP को सेक्शन 55 के तहत किसी भी श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, और यह शक्ति केवल पुलिस कमिश्नर, जिला मजिस्ट्रेट और विशेष रूप से सक्षम उपविभागीय मजिस्ट्रेट को ही मिलती है।”

इस निर्णय के तुरंत बाद, अप्रैल 2026 में बेलगावी के SP द्वारा जारी एक बाहरी आदेश, जिसमें 54‑वर्षीय श्रमिक चंद्रकांत शंकर वड्डर को निलंबित किया गया था, भी निरस्त कर दिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कार्यकारी निर्देश केवल तब लागू हो सकते हैं जब किसी कानून में अंतर हो, परंतु वे मुख्य विधान के स्पष्ट प्रावधानों को बदल नहीं सकते।

इतिहास और पृष्ठभूमि

पुलिस अधिनियम, 1963, कर्नाटक के कानून के तहत सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाहरी आदेश (Externment) जारी करने की शक्ति को परिभाषित करता है। 2024 और 2025 में सरकार ने SPs को यह शक्ति देने के लिए अधिसूचनाएँ जारी कीं, जिससे व्यापक विवाद हुआ।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह निर्णय राज्य के भीतर पुलिस और प्रशासनिक शक्तियों के बीच संतुलन को स्पष्ट करता है। यह नागरिकों के अधिकारों और पुलिस के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल स्थापित करता है।

“कानून का सही व्याख्या करने से ही प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग रोका जा सकता है।”

Did You Know?

Did You Know?: कर्नाटक का पुलिस अधिनियम 1963 भारत के पहले राज्य-विशिष्ट पुलिस कानूनों में से एक है, जिसे 1960 के दशक में लागू किया गया था।

Frequently Asked Questions

1. SP को बाहरी आदेश देने का अधिकार क्यों नहीं मिला? क्योंकि कानून में केवल पुलिस कमिश्नर, जिला मजिस्ट्रेट और विशेष रूप से सक्षम उपविभागीय मजिस्ट्रेट को ही यह शक्ति मिलती है।

2. इस निर्णय का निपटारा कैसे किया गया? उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की अधिसूचना को निरस्त कर दिया और बेलगावी SP के बाहरी आदेश को भी रद्द कर दिया।