प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹40 करोड़ के हैशपी क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने 'TCX' नामक फर्जी टोकन के माध्यम से निवेशकों को लुभाकर उनके पैसे हड़प लिए थे।

  • ED ने चेन्नई, कोयंबटूर और कोलकाता में 11 ठिकानों पर छापेमारी की।
  • हैशपी (HashPe) नामक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ₹40 करोड़ की धोखाधड़ी की गई।
  • दो मुख्य आरोपियों, इमरान बाशा और हितेश कुमार को गिरफ्तार किया गया है।
  • अपराध की राशि को शेल कंपनियों और व्यक्तिगत खातों में डायवर्ट किया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चेन्नई इकाई ने 'हैशपी क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी' मामले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुदुचेरी साइबर क्राइम पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर की गई है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीके से जनता को ठगा और लगभग ₹40 करोड़ की राशि का गबन किया।

धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi)

जांच के अनुसार, हितेश कुमार, इमरान बाशा और सैयद उस्मान उर्फ बाबू ने मिलकर 'HashPe' नाम से एक फर्जी निवेश योजना शुरू की थी। उन्होंने इसे एक वैध क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया। निवेशकों को 'TCX' नामक एक फर्जी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए लुभाया गया, जिसमें भारी मुनाफे का वादा किया गया था।

इस घोटाले को बड़ा रूप देने के लिए आरोपियों ने बॉलीवुड हस्तियों को शामिल किया, भव्य प्रचार कार्यक्रम आयोजित किए और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर अभियान चलाए। जैसे ही निवेशकों ने बड़ी मात्रा में पैसा लगाया, हैशपी टोकन की कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर दिखाया गया और फिर निवेशकों के पैसे निकालने (withdrawals) के रास्ते बंद कर दिए गए।

BozokMedia विश्लेषण: धन शोधन का जाल

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक साधारण धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि एक जटिल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क था। एकत्र की गई राशि को शेल संस्थाओं, रिश्तेदारों और सहयोगियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया था। जांच में पाया गया कि अपराध की कमाई का उपयोग आरोपियों द्वारा विलासितापूर्ण जीवन जीने और अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया था।

क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर चल रहे ऐसे फर्जी निवेश मॉडल निवेशकों की भावनाओं और तकनीकी अज्ञानता का फायदा उठाते हैं।

ED ने चेन्नई, कोयंबटूर और कोलकाता में कुल 11 स्थानों पर तलाशी ली, जिससे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज बरामद हुए हैं। आरोपियों को विशेष PMLA अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: क्रिप्टो धोखाधड़ी का बढ़ता खतरा

भारत में पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर धोखाधड़ी के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। चूंकि क्रिप्टो बाजार अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाला और अक्सर अनियमित होता है, अपराधी 'हाई रिटर्न' का झांसा देकर नए निवेशकों को निशाना बनाते हैं। पुदुचेरी से शुरू हुई यह जांच अब एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा कर सकती है।

Frequently Asked Questions

1. हैशपी (HashPe) घोटाला क्या था?
यह एक फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म था जिसने 'TCX' टोकन के माध्यम से निवेशकों से ₹40 करोड़ की धोखाधड़ी की।

2. ED ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
ED ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और कई ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।

Did You Know?: क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी में अपराधी अक्सर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और मशहूर हस्तियों का उपयोग करके भरोसा जीतते हैं।