झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL-2023 परीक्षा में धांधली के मामले में झारखंड CID ने पलामू के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
- झारखंड CID ने पलामू निवासी कुंदन कुमार को गिरफ्तार किया है।
- JSSC-CGL परीक्षा अनियमितता मामले में अब तक कुल 10 लोग पकड़े जा चुके हैं।
- मामले में मुख्य आरोपी अभय तिवारी और उनके परिवार के सदस्य भी जेल में हैं।
- हाईकोर्ट ने सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगा रखी है।
झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में धांधली के खिलाफ चल रही जांच में एक और बड़ी सफलता मिली है। झारखंड पुलिस की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने सोमवार को आधिकारिक पुष्टि की कि उन्होंने JSSC-CGL-2023 परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है।
CID द्वारा जारी बयान के अनुसार, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान कुंदन कुमार के रूप में हुई है, जो पलामू जिले के डुमरी गांव का निवासी है। इस गिरफ्तारी के साथ ही, 18 अगस्त से अब तक इस घोटाले से जुड़े कुल 10 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। यह मामला 2024 में आयोजित झारखंड स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (JSSC-CGL) से संबंधित है, जिसमें व्यापक स्तर पर धांधली के आरोप लगे थे।
जांच का घटनाक्रम और गिरफ्तारियां
CID की जांच टीम ने पिछले कुछ हफ्तों में कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की हैं। अगस्त के अंत में, गिरिडीह जिले से एक आरोपी, चार सफल उम्मीदवार और दो अन्य संदिग्धों को पकड़ा गया था। इससे पहले, जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत में इस मामले के मास्टरमाइंड अभय तिवारी (जो तत्कालीन पोरियाहट, गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर थे), उनकी पत्नी सुष्मा कुमारी और उनके भाई अक्षय तिवारी को भी गिरफ्तार किया गया था।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना राज्य की प्रशासनिक अखंडता के लिए अनिवार्य है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल कुछ गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड की संपूर्ण भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। छात्रों द्वारा किए गए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद, राज्य सरकार ने JSSC-CGL-2023 सहित कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। हालांकि, सफल उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने सरकार के इस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिससे मामला अब कानूनी और प्रशासनिक पेच में फंस गया है।
यह जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह धांधली संगठित तरीके से की गई थी और क्या इसमें अन्य उच्चाधिकारी भी शामिल हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में विवादों का सिलसिला थमा नहीं है। JPSC और JSSC जैसी संस्थाओं पर अक्सर पारदर्शिता की कमी और पेपर लीक के आरोप लगते रहे हैं, जिसके कारण छात्रों को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा है।
Frequently Asked Questions
1. JSSC-CGL-2023 परीक्षा कब आयोजित की गई थी?
यह परीक्षा 21 और 22 सितंबर, 2024 को आयोजित की गई थी।
2. क्या परीक्षा रद्द कर दी गई है?
सरकार ने इसे रद्द करने की घोषणा की थी, लेकिन झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगा रखी है।