दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी भवन गिरने के बाद बिहार के एक छात्र ने मलबे के नीचे से अपने परिवार को फोन किया। छात्र के जीवित बचने के बावजूद, बचाव कार्य में हुई चार घंटे की देरी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी भवन ढहा, 7 लोगों की मौत।
- बिहार के 20 वर्षीय छात्र आदित्य को मलबे के नीचे से फोन करने के बाद सुरक्षित निकाला गया।
- बचाव कार्य में हुई चार घंटे की देरी ने परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा किया।
- भवन मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया।
दक्षिण दिल्ली के छात्र बहुल इलाके सत्य निकेतन में रविवार को एक भीषण हादसा हुआ, जहाँ एक पांच मंजिला पीजी (पेइंग गेस्ट) आवास ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस हृदयविदारक घटना में सात लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस त्रासदी के बीच, बिहार के एक छात्र, आदित्य, की कहानी ने पूरे देश का ध्यान खींचा है, जो मलबे के नीचे दबे होने के बावजूद अपने परिवार से संपर्क करने में सफल रहा।
आदित्य, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के पास रहकर बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था, मात्र चार दिन पहले ही इस पीजी में रहने आया था। भवन गिरने के तुरंत बाद, उसने अपनी बहन को फोन किया और बताया कि वह मलबे के नीचे फंसा हुआ है और उसके फोन की बैटरी खत्म होने वाली है। इस फोन कॉल ने जहाँ एक ओर परिवार को राहत दी, वहीं दूसरी ओर बचाव दल की सुस्ती को भी उजागर कर दिया।
बचाव कार्य में देरी पर उठे गंभीर सवाल
आदित्य के पिता, राजू कुमार, जो पटना में डाकघर में कार्यरत हैं, ने प्रशासन और बचाव दल की कार्यक्षमता पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि आदित्य सचेत था और मलबे के नीचे से लगातार मदद के लिए पुकार रहा था, तो उसे बाहर निकालने में लगभग चार घंटे का समय क्यों लगा? आदित्य शीर्ष मंजिल पर था, जिससे वह मलबे की गहराई में नहीं दबा, लेकिन घंटों का इंतजार किसी भी परिवार के लिए असहनीय था।
घटना के दौरान आदित्य ने मलबे के अंदर से एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जो बाद में सोशल मीडिया और छात्र समूहों में वायरल हो गया। उस भयावह वीडियो में धूल और सीमेंट से लथपथ चेहरा और चारों ओर कंक्रीट के स्लैब दिखाई दे रहे थे, जो उस समय की भयावह स्थिति का प्रमाण थे।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि दिल्ली के छात्र इलाकों में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। सत्य निकेतन जैसे इलाकों में, जहाँ छात्र भारी संख्या में पीजी में रहते हैं, इमारतों की संरचनात्मक अखंडता (structural integrity) की जांच न होना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। मरम्मत कार्य के दौरान भवन का गिरना यह दर्शाता है कि निर्माण और मरम्मत के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
मलबे के नीचे से फोन कॉल का आना बचाव कार्य की विफलता नहीं, बल्कि संचार की उपलब्धता के बावजूद कार्रवाई में देरी का संकेत है।
पुलिस ने इस मामले में भवन मालिक हरिराम गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उसे राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया है। मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या भवन में अवैध निर्माण या घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था।
Historical Background
दिल्ली के दक्षिण परिसर (South Campus) के आसपास के इलाकों में पीजी और हॉस्टल की मांग बहुत अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में, जगह की कमी के कारण कई पुराने भवनों में अवैध रूप से अतिरिक्त मंजिलें जोड़ी गई हैं, जिससे इन इमारतों के ढहने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सत्य निकेतन हादसे में कितने लोगों की मृत्यु हुई?
उत्तर: इस हादसे में अब तक सात लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है।
प्रश्न 2: क्या पुलिस ने किसी को गिरफ्तार किया है?
उत्तर: हाँ, पुलिस ने भवन मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है।