गुजरात हाईकोर्ट और सूरत सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की फर्जी ईमेल भेजने के मामले में पुलिस ने चेन्नई से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह साजिश NDPS मामले में सुनवाई से बचने के लिए रची गई थी।

  • गुजरात पुलिस ने चेन्नई से दो आरोपियों, मोहम्मद अस्फक और राजेश को गिरफ्तार किया है।
  • आरोपियों ने गुजरात हाईकोर्ट और सूरत कोर्ट को बम से उड़ाने की फर्जी ईमेल भेजी थी।
  • मुख्य आरोपी NDPS मामले में फरार था और सुनवाई टालने के लिए यह साजिश रची गई थी।
  • आरोपी तकनीकी रूप से सक्षम थे और अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार होटल बदल रहे थे।

गुजरात पुलिस ने सोमवार को एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए चेन्नई से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने 5 सितंबर को गुजरात हाईकोर्ट (अहमदाबाद) और सूरत सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की फर्जी ईमेल भेजी थी। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश थी, जिसका उद्देश्य कानूनी कार्यवाही में देरी करना था।

अहमदाबाद नगर पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी मोहम्मद अस्फक मोहम्मद असलम अंसारी (28), जो सूरत का निवासी है, एक NDPS (नशीली दवाओं के अवैध व्यापार से संबंधित अधिनियम) मामले में आरोपी है। वह parole पर बाहर आया था लेकिन फिर फरार हो गया। शनिवार को सूरत कोर्ट में उसकी सुनवाई होनी थी, जिससे बचने के लिए उसने यह कदम उठाया।

साजिश का तरीका और तकनीकी हेरफेर

आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए उच्च स्तर की तकनीकी चालाकी का उपयोग किया। अस्फक ने मुंबई से चेन्नई की ट्रेन यात्रा के दौरान एक फर्जी ईमेल आईडी बनाई। इसके बाद, दोनों आरोपी चेन्नई में अपनी लोकेशन छिपाने के लिए लगातार अलग-अलग होटलों में रुकते रहे। उन्होंने ईमेल में लिखा था, "Bomb rdx Ahmedabad and Surat court aaj bomb blast hoga", जिससे न्यायिक प्रणाली में दहशत पैदा करने की कोशिश की गई।

यह मामला दर्शाता है कि कैसे अपराधी न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने के लिए साइबर टूल्स का दुरुपयोग कर रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रकार की 'होक्स' (Hoax) गतिविधियां न केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं, बल्कि महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रियाओं को भी बाधित करती हैं। यदि अपराधी इस तरह की धमकियों से अदालतों को डराकर कानूनी कार्यवाही को रोक पाते हैं, तो यह कानून के शासन के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।

पुलिस ने बताया कि अस्फक और उसके साथी राजेश उर्फ राज माइकल मुनिया (33) जेल में साथ रहे थे। चेन्नई में वे गांजा के सप्लायर की तलाश में गए थे और वहीं से उन्होंने इस आपराधिक षड्यंत्र को अंजाम दिया। दोनों को ट्रांजिट वारंट के माध्यम से अहमदाबाद लाया गया है।

Did You Know?: साइबर अपराधी अक्सर अपनी डिजिटल फुटप्रिंट मिटाने के लिए VPN और फर्जी ईमेल सर्वरों का उपयोग करते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

Frequently Asked Questions

1. आरोपियों ने बम की धमकी क्यों दी थी?
मुख्य आरोपी NDPS मामले में अदालत की सुनवाई से बचना चाहता था और कानूनी कार्यवाही में देरी करना चाहता था।

2. आरोपी कहाँ से पकड़े गए?
दोनों आरोपियों को तमिलनाडु के चेन्नई से गिरफ्तार किया गया।