कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पशु चिकित्सकों की भर्ती में हुए बड़े घोटाले के आरोपी निलंबित KPSC अध्यक्ष साहूकार एस शिवशंकरप्पा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने परीक्षा प्रणाली में हो रहे व्यवस्थित भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
- कर्नाटक हाईकोर्ट ने निलंबित KPSC अध्यक्ष साहूकार एस शिवशंकरप्पा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
- अदालत ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में बढ़ते घोटालों के कारण जनता का भरोसा खत्म हो रहा है।
- आरोप है कि परीक्षा पेपर लीक करने और उम्मीदवारों के चयन में मिलीभगत के लिए भारी रिश्वत ली गई।
- CID जांच में चेयरमैन और उनके बेटे के संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड्स सामने आए हैं।
बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में हो रहे व्यवस्थित परीक्षाओं के घोटालों के कारण आम जनता का परीक्षा प्रणाली से भरोसा उठ रहा है। अदालत ने पशु चिकित्सकों (Veterinarians) की भर्ती में हुए बड़े घोटाले के आरोपी, निलंबित कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष साहूकार एस शिवशंकरप्पा की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति विश्वजीत शेट्टी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत की विवेकाधीन शक्ति का उपयोग ऐसे मामलों में नहीं किया जा सकता जहां सार्वजनिक संस्थान की विश्वसनीयता दांव पर हो। अदालत ने टिप्पणी की, "हम देख रहे हैं कि NEET जैसी परीक्षाओं में कितने मेधावी छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। यह केवल एक परिणाम का मामला नहीं है, बल्कि इसमें कई गहरे मुद्दे शामिल हैं।"
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल एक भर्ती घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की प्रशासनिक और परीक्षा संबंधी निष्पक्षता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। यदि आयोग के शीर्ष अधिकारी ही भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में चला जाता है।
राज्य के लोक अभियोजक बी एन जगदीश ने अदालत में साक्ष्य पेश करते हुए बताया कि यह एक 'व्यवस्थित धोखाधड़ी' (Systematic Fraud) है। इसमें निलंबित अध्यक्ष, उनके परिवार के सदस्य, परीक्षा नियंत्रक और बिचौलिए शामिल थे। CID की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि शिवशंकरप्पा और उनके बेटे ने गिरफ्तार किए गए बिचौलिए के साथ एन्क्रिप्टेड इंटरनेट कॉल के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए रखा था।
"जब परीक्षा प्रणाली के रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो समाज का लोकतांत्रिक ढांचा चरमरा जाता है।"
जांच में यह भी सामने आया है कि जनवरी 2026 में आयोजित पशु चिकित्सक भर्ती परीक्षा के दौरान, जिन उम्मीदवारों ने रिश्वत दी थी, उन्हें गुप्त स्थानों पर रखा गया था और परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नों के उत्तर देने का प्रशिक्षण दिया गया था। लगभग 80 लाख रुपये तक की रिश्वत के बदले चयन सुनिश्चित किया गया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
साहूकार एस शिवशंकरप्पा को 2021 में भाजपा सरकार के दौरान KPSC अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इससे पहले, उन्हें अपनी बेटी के फर्जी आय प्रमाण पत्र के माध्यम से सरकारी नौकरी दिलाने के मामले में भी निलंबित किया जा चुका है।
Frequently Asked Questions
1. मामला क्या है? यह मामला 400 पशु चिकित्सकों की भर्ती में हुए पेपर लीक और रिश्वतखोरी से संबंधित है।
2. अदालत ने क्या कहा? अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपियों को खुलेआम घूमने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे जनता का विश्वास टूटता है।