राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने चिकित्सा लापरवाही के एक मामले में मुआवजे की राशि बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दी है। यह फैसला एक केरल महिला की मृत्यु के बाद आया, जिसकी ओवेरियन सिस्ट सर्जरी के दौरान गंभीर चूक हुई थी।
- NCDRC ने चिकित्सा लापरवाही के मामले में मुआवजे को बढ़ाकर 6 लाख रुपये किया।
- कोर्ट ने माना कि डॉक्टर और नर्सिंग होम पोस्ट-सर्जरी देखभाल में विफल रहे।
- यूरेटर इंजरी (मूत्रनली की चोट) और उसके बाद हुए संक्रमण को समय पर न पहचानना बड़ी चूक माना गया।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने चिकित्सा लापरवाही के एक पुराने मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दिया है। यह मामला 2007 का है, जब केरल की एक महिला की ओवेरियन सिस्ट (अंडाशय की गांठ) की सर्जरी के बाद उसकी मृत्यु हो गई थी।
अपील सुनते हुए राष्ट्रपति ए.पी. सही और सदस्य भारतकुमार पंड्या की पीठ ने स्पष्ट किया कि हालांकि सर्जरी के दौरान हुई चोट को पूरी तरह से लापरवाही नहीं माना जा सकता, लेकिन सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति की निगरानी करने में डॉक्टर और नर्सिंग होम की ओर से "स्पष्ट कमी" (clear deficiency) रही है।
मामले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
पीड़ित महिला के बच्चों के अनुसार, अप्रैल 2007 में उनकी माताजी ने पेट दर्द की शिकायत की थी। अल्ट्रासाउंड में एक छोटी सिस्ट पाई गई, जिसे डॉक्टर ने गंभीर बताते हुए तत्काल सर्जरी की सलाह दी। 2 सितंबर 2007 को सर्जरी की गई, जिसके बाद महिला को गंभीर पेट दर्द और लगातार उल्टी जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ा।
आरोप है कि सर्जरी के बाद उचित देखभाल नहीं की गई और 9 मई 2007 को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। जब स्थिति बिगड़ी और उन्हें दोबारा भर्ती कराया गया, तब स्कैन में यूरेटर (ureter) यानी मूत्रनली में क्षति का पता चला। अंततः, सेप्टिसीमिया (रक्त विषाक्तता) के कारण 6 जून 2007 को उनकी मृत्यु हो गई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this ruling reinforces the legal principle that a doctor's responsibility does not end with the surgical procedure. The failure to anticipate known complications, especially in patients with a history of abdominal surgeries, constitutes a deficiency in service. It highlights the necessity of multidisciplinary consultation (like involving a urologist) when post-operative symptoms persist.
"चिकित्सा मानकों का पालन केवल सर्जरी तक सीमित नहीं है, बल्कि रिकवरी के दौरान संभावित जटिलताओं की समय पर पहचान करना डॉक्टर का कानूनी और नैतिक कर्तव्य है।"
केरल राज्य उपभोक्ता आयोग ने पहले इस मामले में 3.75 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था, जिसे अब NCDRC ने बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दिया है। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि ये "मान्यता प्राप्त चिकित्सा जटिलताएं" थीं, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया।
| विवरण | राज्य आयोग का फैसला | NCDRC का अंतिम फैसला |
|---|---|---|
| मुआवजा राशि | 3.75 लाख रुपये | 6 लाख रुपये |
| लापरवाही का आधार | सर्जरी और सेवा में कमी | पोस्ट-ऑपरेटिव केयर और निगरानी में कमी |
Frequently Asked Questions
1. NCDRC ने मुआवजे की राशि क्यों बढ़ाई?
आयोग ने माना कि राज्य आयोग द्वारा दिया गया मुआवजा बहुत कम था और डॉक्टर ने पोस्ट-सर्जरी जटिलताओं को पहचानने में गंभीर लापरवाही बरती थी।
2. इस मामले में मुख्य चिकित्सा चूक क्या थी?
मुख्य चूक यह थी कि डॉक्टर ने यूरेटर इंजरी की संभावना को नजरअंदाज किया और समय पर यूरोलॉजिस्ट से परामर्श नहीं लिया।