तिरुनेलवेली की एक विशेष पोक्सो (POCSO) अदालत ने 16 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में एक व्यक्ति को मौत की सजा और दो अन्य को लंबी जेल की सजा सुनाई है।

  • विशेष पोक्सो अदालत ने एक आरोपी को मौत की सजा सुनाई।
  • दो अन्य साथियों को क्रमशः 20 साल और 13 साल की जेल हुई।
  • यह अपराध 2022 में एक 16 वर्षीय नाबालिग के साथ किया गया था।

बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों के विरुद्ध एक कड़ा कदम उठाते हुए, तिरुनेलवेली में बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम की विशेष अदालत ने सामूहिक बलात्कार के एक मामले में एक अपराधी को मौत की सजा सुनाई है। विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेश कुमार द्वारा सुनाया गया यह फैसला नाबालिगों के यौन शोषण के प्रति न्यायपालिका के शून्य-सहिष्णुता दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।

यह हृदयविदारक घटना 2022 की है। अभियोजन पक्ष ने स्थापित किया कि 16 वर्षीय पीड़िता की मुलाकात विलाथिकुलम के 25 वर्षीय पेंटर मुनीश्वरन से एक पूजा स्थल पर हुई थी। लगभग दो सप्ताह तक दोनों के बीच फोन पर संपर्क रहा, जिस दौरान मुनीश्वरन ने शादी का झूठा वादा कर नाबालिग को अपने जाल में फंसाया।

अपराध तब बढ़ा जब मुनीश्वरन लड़की को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर मीनाक्षीपुरम में अपनी बड़ी बहन के घर ले गया। वहां उसके साथ यौन शोषण करने के बाद, उसने अपने दो दोस्तों, चिन्नकुट्टी (28) और मुरुगेसन (23) को वहां बुलाया। अदालत में पेश सबूतों के अनुसार, दोनों साथियों ने भी नाबालिग का यौन शोषण किया, जिससे यह मामला सामूहिक बलात्कार में बदल गया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि इस मामले में मौत की सजा का प्रावधान भारत में नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के लिए 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (rarest of rare) सिद्धांत का उपयोग करने की बढ़ती न्यायिक प्रवृत्ति को दर्शाता है। चिन्नकुट्टी को मौत की सजा सुनाकर, अदालत अपराधियों को यह कड़ा संदेश दे रही है कि विश्वासघात और बच्चे की गरिमा का उल्लंघन सबसे कठोर कानूनी दंड का सामना करेगा।

इस मामले में पोक्सो अधिनियम का त्वरित और सख्त कार्यान्वयन यह याद दिलाता है कि कानूनी प्रणाली अब अपराधी के अधिकारों के बजाय पीड़ित के आघात को प्राथमिकता दे रही है।

इस घटना के बाद, पीड़िता ने साहस दिखाते हुए अपने माता-पिता को सूचित किया, जिन्होंने तुरंत पालयमकोट्टई महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद की जांच में तीनों संदिग्धों को तेजी से गिरफ्तार किया गया, जिससे मुकदमे के लिए सबूतों की श्रृंखला बरकरार रही।

सजा के विवरण के अनुसार, चिन्नकुट्टी को मौत की सजा सुनाई गई है, जबकि मुरुगेसन और मुनीश्वरन को क्रमशः 20 साल और 13 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।

क्या आप जानते हैं?: 2012 का पोक्सो अधिनियम विशेष रूप से बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करने और बाल-अनुकूल अदालत प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: फैसला किस अदालत ने सुनाया?
फैसला तिरुनेलवेली में बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम मामलों की विशेष अदालत द्वारा सुनाया गया।

प्रश्न 2: तीनों आरोपियों को क्या सजा मिली?
चिन्नकुट्टी को मौत की सजा, मुरुगेसन को 20 साल की जेल और मुनीश्वरन को 13 साल की जेल की सजा मिली।