केरल उपभोक्ता आयोग ने एक ऑनलाइन स्टोर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है। एक महिला द्वारा ऑर्डर की गई अनारकली ड्रेस न भेजने पर कोर्ट ने स्टोर को रिफंड और भारी मुआवजा देने का आदेश दिया है।
- केरल उपभोक्ता आयोग ने इंस्टाग्राम स्टोर को उपभोक्ता के प्रति लापरवाह पाया।
- महिला को ड्रेस की कीमत के साथ 15,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा मिला।
- डिलीवरी समय सीमा का पालन न करना 'अनुचित व्यापार व्यवहार' माना गया।
केरल के कन्नूर जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक ऑनलाइन कुट्योर स्टोर को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का दोषी ठहराया है। यह मामला तब शुरू हुआ जब एक महिला ने अक्टूबर 2024 में इंस्टाग्राम के माध्यम से 1,545 रुपये की एक अनारकली ड्रेस और दुपट्टा ऑर्डर किया, लेकिन वादा किए गए समय के बाद भी उसे उत्पाद प्राप्त नहीं हुआ।
आयोग के अध्यक्ष रवि सुषा और सदस्य मोली कुट्टी मैथ्यू एवं सजीश के पी ने पाया कि स्टोर ने न केवल डिलीवरी में देरी की, बल्कि ग्राहक के बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑर्डर देने के 146 दिन बाद भी स्टोर का रवैया उदासीन था, जिससे ग्राहक को मानसिक और वित्तीय परेशानी हुई।
मामले का विस्तृत विवरण
पीड़ित महिला ने बताया कि वह इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देखकर आकर्षित हुई और 3 अक्टूबर 2024 को गूगल पे के जरिए भुगतान किया। स्टोर की शिपिंग पॉलिसी के अनुसार, उत्पाद 70 से 90 कार्य दिवसों के भीतर भेजा जाना था। हालांकि, 90 दिन बीत जाने के बाद भी ड्रेस नहीं पहुंची। जब महिला ने फरवरी 2025 में संपर्क किया, तो उसे मार्च में डिलीवरी का आश्वासन दिया गया, लेकिन आठ महीने बाद भी कुछ नहीं मिला। महिला का आरोप है कि डिलीवरी की मांग करने पर स्टोर ने उसके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
स्टोर का तर्क और कोर्ट की टिप्पणी
बचाव पक्ष (स्टोर) ने तर्क दिया कि कपड़े के स्टॉक में एक दुर्घटना के कारण नुकसान हुआ था, जिससे डिलीवरी में देरी हुई। उन्होंने दावा किया कि इस बारे में महिला को ईमेल के जरिए सूचित किया गया था। हालांकि, आयोग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने नोट किया कि स्टोर की अपनी पॉलिसी के अनुसार अधिकतम 90 दिनों में डिलीवरी होनी चाहिए थी, लेकिन 146 दिनों के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सोशल मीडिया कॉमर्स (S-Commerce) के दौर में उपभोक्ता अक्सर असुरक्षित होते हैं। यह फैसला एक मिसाल है कि इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर चलने वाले छोटे स्टोर भी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में आते हैं और वे अपनी शिपिंग पॉलिसी से बंधे होते हैं।
"डिजिटल युग में 'शिपिंग पॉलिसी' केवल एक औपचारिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक कानूनी अनुबंध है जिसका उल्लंघन करने पर विक्रेता को भारी जुर्माना देना पड़ सकता है।"
| विवरण | स्टोर का दावा | कोर्ट का निष्कर्ष |
|---|---|---|
| डिलीवरी समय | उपलब्धता के आधार पर भिन्न | अधिकतम 90 दिन (पॉलिसी के अनुसार) |
| ग्राहक संचार | ईमेल द्वारा सूचित किया | 146 दिनों तक कोई उचित जवाब नहीं |
| परिणाम | देरी आधारहीन है | सेवा में कमी और अनुचित व्यापार |
Frequently Asked Questions
1. क्या इंस्टाग्राम स्टोर के खिलाफ उपभोक्ता कोर्ट में शिकायत की जा सकती है?
हाँ, यदि कोई स्टोर भुगतान स्वीकार करता है और सेवा प्रदान नहीं करता, तो वह उपभोक्ता कानून के तहत जवाबदेह है।
2. इस मामले में महिला को कुल कितनी राशि मिली?
महिला को 1,545 रुपये का रिफंड, 10,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना के लिए और 5,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में कुल 16,545 रुपये मिले।