केरल के एक यूट्यूबर को उपभोक्ता फोरम ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने ट्रैवल एजेंसी को आदेश दिया है कि वह न केवल रिफंड दे, बल्कि मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजा भी अदा करे।

  • ट्रिस्सूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ट्रैवल एजेंसी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया।
  • एजेंसी को ₹82,500 का रिफंड और ₹30,000 का मुआवजा व कानूनी खर्च देने का आदेश।
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महामारी के बाद यात्राएं शुरू होने पर पैसे रोकना गैरकानूनी है।

केरल के ट्रिस्सूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए एक ट्रैवल एजेंसी को आदेश दिया है कि वह एक यूट्यूबर को उनके द्वारा भुगतान की गई राशि और मुआवजा वापस करे। यह मामला दिसंबर 2019 का है, जब शिकायतकर्ता ने बाली, इंडोनेशिया के लिए एक टूर पैकेज बुक किया था।

मामले के विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता एक यात्रा प्रेमी हैं और अपना एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं। उन्होंने विज्ञापन देखकर ₹82,500 का भुगतान किया था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण यात्रा रद्द हो गई। आयोग ने स्वीकार किया कि महामारी एक अप्रत्याशित घटना थी, लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब अंतरराष्ट्रीय यात्राएं फिर से शुरू हो गईं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यात्रा प्रतिबंध हटने के बाद उन्होंने बार-बार एजेंसी से संपर्क किया, लेकिन एजेंसी ने 2022 और 2023 में अलग-अलग तारीखें बताकर उन्हें केवल गुमराह किया और न तो ट्रिप आयोजित की और न ही पैसे वापस किए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला उन हजारों यात्रियों के लिए एक मिसाल है जिन्होंने महामारी के दौरान अपनी जमा पूंजी ट्रैवल एजेंसियों में फंसा दी थी। यह स्पष्ट करता है कि 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) या दैवीय आपदा का उपयोग केवल अस्थायी देरी के लिए किया जा सकता है, न कि ग्राहक के पैसे को स्थायी रूप से हड़पने के लिए।

"उपभोक्ता अधिकारों का हनन तब होता है जब सेवा प्रदाता अपनी अक्षमता को छिपाने के लिए ग्राहक को झूठे आश्वासनों के जाल में फंसाता है।"

आयोग के अध्यक्ष सी टी सबु और सदस्यों श्रीजा एस और राम मोहन आर ने पाया कि एजेंसी ने नोटिस मिलने के बावजूद मामले में अपना पक्ष नहीं रखा, जिससे उनकी गलती और स्पष्ट हो गई।

विवरणभुगतान की गई राशिआदेशित कुल भुगतान
मूल पैकेज लागत₹82,500₹82,500 (रिफंड)
मुआवजा और कानूनी खर्च₹0₹30,000
कुल योग₹82,500₹1,12,500
क्या आप जानते हैं?: भारत में उपभोक्ता अपनी शिकायतों के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या महामारी के कारण ट्रिप कैंसिल होना एजेंसी की गलती थी?
नहीं, कोर्ट ने माना कि महामारी एजेंसी के नियंत्रण से बाहर थी, लेकिन यात्राएं शुरू होने के बाद भी पैसे न लौटाना 'सेवा में कमी' है।

प्रश्न 2: उपभोक्ता फोरम ने मुआवजे की राशि कैसे तय की?
फोरम ने शिकायतकर्ता द्वारा झेली गई मानसिक प्रताड़ना, असुविधा और कानूनी लड़ाई में हुए खर्च को आधार बनाकर ₹30,000 का मुआवजा तय किया।