मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने कैदियों पर लगाए गए अत्यधिक टेलीफोन शुल्कों की समीक्षा करने की मांग वाली एक याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने जेल कॉल टैरिफ पर राज्य से जवाब मांगा।
- कैदियों को हर 10 मिनट की कॉल के लिए लगभग ₹28 देने पड़ रहे हैं।
- याचिका में निर्धन, वृद्ध और दिव्यांग कैदियों के लिए मुफ्त संचार की मांग की गई है।
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने जेल के कैदियों से लिए जा रहे टेलीफोन शुल्कों और बाजार में उपलब्ध टेलीकॉम दरों के बीच भारी अंतर पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. सक्तिवेल की खंडपीठ ने मदुरै के के.आर. राजा द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
यह याचिका गृह विभाग द्वारा 2023 में जारी एक सरकारी आदेश (G.O.) को चुनौती देती है। हालांकि इस आदेश का उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के माध्यम से जेलों में वॉयस और वीडियो-कॉल सुविधाएं प्रदान करना था, लेकिन इसकी लागत कैदियों के लिए बोझ बन गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार, कैदियों को हर 10 मिनट की कॉल के लिए लगभग ₹28 देने पड़ते हैं, जिससे मासिक खर्च लगभग ₹280 तक पहुंच जाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल वित्तीय विवाद नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों का मामला है। परिवार से संपर्क कैदियों के पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। जब एक बुनियादी फोन कॉल की लागत आम जनता के लिए उपलब्ध अनलिमिटेड प्लान (₹200 से ₹350) से अधिक हो जाती है, तो यह एक व्यवस्थागत बाधा बन जाती है जो गरीबों को सबसे अधिक प्रभावित करती है।
"बुनियादी संचार के लिए कैदियों से बाजार दर से अधिक शुल्क लेना एक प्रकार की अप्रत्यक्ष सजा है, जो समान व्यवहार के सिद्धांत का उल्लंघन करती है।"
याचिकाकर्ता ने रेखांकित किया कि हालांकि कॉल की सीमा बढ़ाकर महीने में 10 कॉल (120 मिनट तक) कर दी गई है, लेकिन इसकी वहनीयता एक बड़ी समस्या है। चूंकि कैदी जेल में रहकर पैसा नहीं कमा सकते, वे पूरी तरह बाहरी मदद पर निर्भर होते हैं, जिससे ₹280 का मासिक खर्च कई लोगों के लिए असंभव हो जाता है।
इसके अलावा, याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि निर्धन, वृद्ध, महिलाओं और दिव्यांग कैदियों को पूरी तरह से मुफ्त संचार सुविधाएं प्रदान की जाएं, ताकि गरीबी उनके कानूनी और भावनात्मक समर्थन के बीच बाधा न बने।
| विशेषता | कैदी टैरिफ (लगभग) | आम जनता का टैरिफ |
|---|---|---|
| 10 मिनट की लागत | ₹28 | लगभग शून्य (अनलिमिटेड प्लान) |
| मासिक खर्च | ₹280 (सीमित) | ₹200 - ₹350 (अनलिमिटेड) |
| पहुंच | नियंत्रित बूथ | व्यक्तिगत मोबाइल डिवाइस |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: मामले की वर्तमान स्थिति क्या है?
मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को तय की गई है।
प्रश्न 2: याचिका के अनुसार किसे मुफ्त कॉल की सुविधा मिलनी चाहिए?
याचिकाकर्ता ने निर्धन, वृद्ध, महिला और दिव्यांग कैदियों के लिए मुफ्त सुविधाओं की मांग की है।