त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने NH 108B और NH 208 की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए NHAI और NHIDCL के कामकाज के 'सिस्टमैटिक ऑडिट' का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि करोड़ों की लागत से बनी सड़कें उद्घाटन से पहले ही टूटने लगी हैं।

  • त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने NH 108B और NH 208 की दयनीय स्थिति पर NHAI और NHIDCL के ऑडिट का आदेश दिया।
  • कोर्ट ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार और अधिकारियों व ठेकेदारों के बीच मिलीभगत की आशंका जताई।
  • BRO (सीमा सड़क संगठन) को मरम्मत के बाद सड़कों का ऑडिट कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।

त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राज्य की राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि NH 108B और NH 208 के कई हिस्से "दयनीय स्थिति" में हैं। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति बिस्वजीत पालित की पीठ ने उन नागरिकों के प्रति दुख जताया जिनके जीवन और आजीविका को इन खराब सड़कों के कारण जोखिम में डाल दिया गया है।

यह मामला जून-जुलाई के दौरान समाचार पत्रों में छपी उन रिपोर्टों के बाद सामने आया, जिनमें सड़कों पर गहरे गड्ढों, टूटी सतहों और जलजमाव की तस्वीरें सामने आई थीं। न्यायालय ने पाया कि भारी लागत से बनाए गए राजमार्ग या तो उद्घाटन से पहले ही बिखर रहे हैं या पहले मानसून के आते ही उनकी हालत खराब हो रही है।

भ्रष्टाचार और मिलीभगत का संदेह

कोर्ट ने विशेष रूप से NH 108B के मोहनपुर-हेज़ामारा-सुबलसिंह खंड पर ध्यान दिया, जहाँ प्रति किलोमीटर 5 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, लेकिन भौतिक प्रगति केवल 51.14 प्रतिशत ही थी। अदालत ने इस पर "गंभीर संदेह" व्यक्त करते हुए कहा कि NHIDCL अधिकारियों और EPC ठेकेदारों के बीच मिलीभगत की प्रबल संभावना है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल बुनियादी ढांचे की विफलता नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और जवाबदेही की कमी का एक बड़ा उदाहरण है। जब राष्ट्रीय राजमार्ग, जो देश की आर्थिक जीवन रेखा होते हैं, निर्माण के तुरंत बाद टूटने लगते हैं, तो यह निर्माण गुणवत्ता और निगरानी तंत्र में गहरी खामियों को दर्शाता है।

"बुनियादी ढांचे के निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी न केवल वित्तीय नुकसान है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।"

न्यायालय ने राज्य सरकार की निष्क्रियता को भी "हैरान करने वाला" बताया। कोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार के पास NHIDCL या ठेकेदारों के खिलाफ दीवानी या आपराधिक कार्रवाई करने के पर्याप्त अवसर थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

राजमार्ग (Highway) लंबाई/खंड मुख्य समस्याएँ
NH 108B खवई से अगरतला (55 किमी) गड्ढे, जलजमाव, धीमी प्रगति
NH 208 कुमारघाट से सबरूम (158 किमी) ड्रेनेज की कमी, टूटी सतह

अदालत ने अब NHIDCL को मरम्मत कार्यों पर द्वि-साप्ताहिक (bi-weekly) प्रगति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया है कि मरम्मत के बाद सीमा सड़क संगठन (BRO) के इंजीनियरिंग कर्मी इन सड़कों का ऑडिट करेंगे और 30 जनवरी 2027 तक अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करेंगे।

क्या आप जानते हैं?: भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों का रखरखाव मुख्य रूप से NHAI द्वारा किया जाता है, लेकिन पहाड़ी और रणनीतिक क्षेत्रों में NHIDCL की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने किस एजेंसी के ऑडिट का आदेश दिया है?
न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) के कामकाज के व्यवस्थित ऑडिट का आदेश दिया है।

2. सड़कों की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा?
मरम्मत पूरी होने के बाद, सीमा सड़क संगठन (BRO) के विशेषज्ञ सड़कों का ऑडिट करेंगे।