CBI ने 13 साल से फरार चल रहे जालसाज हरनेक सिंह को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने सिंगापुर में भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों की धोखाधड़ी की थी।

  • हरनेक सिंह 2013 में भारत छोड़कर अवैध रूप से अमेरिका में शरण लिए हुए था।
  • आरोपी ने सिंगापुर इमिग्रेशन अधिकारियों बनकर भारतीय प्रवासियों से पैसे ठगे थे।
  • इंटरपोल रेड नोटिस और लुक-आउट सर्कुलर के बाद अमेरिका से प्रत्यर्पण संभव हुआ।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए उस भगोड़े को गिरफ्तार कर लिया है जो पिछले 13 वर्षों से कानून की नजरों से बच रहा था। आरोपी हरनेक सिंह को बुधवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिका से प्रत्यर्पित (Deport) किए जाने के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया।

यह मामला साल 2013 का है, जब सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों को एक सोची-समझी साजिश के तहत निशाना बनाया गया था। जालसाजों ने खुद को सिंगापुर इमिग्रेशन अधिकारियों के रूप में पेश किया और पीड़ितों को डराया कि उन्होंने अपने एयरपोर्ट डिस्embarkation फॉर्म में गलत जानकारी भरी है, जिसके कारण उन्हें जेल हो सकती है या उन्हें देश से निकाला जा सकता है।

घबराहट में आए पीड़ितों को 'सेटलमेंट फीस' और 'जुर्माने' के नाम पर वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के माध्यम से भारत में निर्धारित खातों में पैसे भेजने के लिए मजबूर किया गया। CBI ने इस मामले में 2016 में दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आईपीसी की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट की धाराएं भी शामिल थीं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कानूनी पहुंच और इंटरपोल के साथ बढ़ते समन्वय को दर्शाती है। यह संदेश देता है कि चाहे अपराधी किसी भी देश में अवैध रूप से शरण ले ले, डिजिटल फुटप्रिंट और अंतरराष्ट्रीय संधियां अंततः उसे न्याय के कठघरे में खड़ा कर देंगी।

"इंटरपोल रेड नोटिस और अमेरिकी न्याय विभाग के साथ समन्वय ने इस दशक पुराने मामले को सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।"

जांच में सामने आया कि हरनेक सिंह ने अपने सहयोगियों आदित्य भारद्वाज (कुरुक्षेत्र) और दीपक जैन (गुड़गांव) के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को चलाया था। जबकि हरनेक फरार था, उसके दोनों साथियों को 26 मई 2025 को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (CBI मामले), पंचकूला द्वारा ढाई साल के कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

हरनेक सिंह ने अमेरिका में रहते हुए भारतीय अदालतों के समन और जमानती वारंटों की अनदेखी की थी। इसके बाद 22 अप्रैल 2024 को पंचकूला कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया, जिसने अंततः उसकी गिरफ्तारी का मार्ग प्रशस्त किया।

क्या आप जानते हैं?: इंटरपोल रेड नोटिस वास्तव में कोई गिरफ्तारी वारंट नहीं है, बल्कि यह सदस्य देशों के लिए एक अनुरोध है कि वे अपने क्षेत्र में मौजूद वांछित व्यक्ति का पता लगाएं और उसे अस्थायी रूप से हिरासत में लें।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: हरनेक सिंह ने पीड़ितों को कैसे ठगा?
उसने सिंगापुर इमिग्रेशन अधिकारी बनकर लोगों को डराया कि उनके फॉर्म में गलती है और समाधान के लिए पैसे मांगे।

प्रश्न 2: इस मामले में अन्य आरोपियों का क्या हुआ?
सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें ढाई साल की सजा मिली है।