बेंगलुरु के डिजिटल पत्रकार महंतेश भद्रवाटी को खरगे परिवार से जुड़े ट्रस्ट की रिपोर्ट के बाद अनजान नंबर से धमकी भरे कॉल और व्हाट्सएप संदेश मिले। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर आरोपी की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • महंतेश भद्रवाटी को 8‑9 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के बाद धमकी मिली।
  • पुलिस ने सेक्शन 352 और 351(3) के तहत FIR दर्ज की।
  • आरोपी की पहचान अभी भी जांच के चरण में है।

बेंगलुरु के कन्नड़ जांच डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म द फाइल के संपादक महंतेश भद्रवाटी ने 8 और 9 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्टों के बाद अनजान नंबर से घिनौने कॉल और व्हाट्सएप संदेश प्राप्त किए, जिसमें उन्हें पोस्ट हटाने की धमकी दी गई।

भद्रवाटी ने बताया कि कॉल करने वाले ने रिपोर्ट के विषय पर सवाल उठाए, गाली‑गलौज की और यदि पोस्ट नहीं हटाए तो उन्हें मार डाला जाएगा, ऐसा कहा। उसी नंबर से उनके फेसबुक पोस्ट पर भी अभद्र टिप्पणी की गई।

Historical Background

खरगे परिवार का ट्रस्ट कई वर्षों से राजनैतिक और आर्थिक विवादों में रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लीकार्जुन खरगे और उनके पुत्र राज्य गृह मंत्री प्रियांक खरगे दोनों इस ट्रस्ट के प्रमुख सदस्यों में गिने जाते हैं। इस प्रकार के ट्रस्ट अक्सर पारदर्शिता और धन उपयोग पर प्रश्न उठाते रहे हैं, जिससे मीडिया जांच को अक्सर प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है।

भद्रवाटी ने अपनी शिकायत में कॉल करने वाले को 21 वर्षीय दिलीप कुमार मलागी बताया, पर पुलिस ने कहा कि यह नंबर किसी और की सिम हो सकती है और वास्तविक अभिकर्ता की पहचान अभी तक नहीं हुई है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that intimidation of journalists undermines democratic accountability, especially when high‑profile political families are involved. ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और प्रेस की स्वतंत्रता दोनों पर असर पड़ता है, जिससे सार्वजनिक भरोसा घटता है।

"मीडिया को डराने की कोशिश लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती है," वरिष्ठ मीडिया विशेषज्ञ डॉ. अंजली वर्मा ने कहा।
Did You Know?: भारत में पत्रकारों को मिलने वाले धमकी कॉल की संख्या 2022‑2025 के बीच 35% बढ़ी है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या पुलिस ने अभी तक धमकी देने वाले की पहचान कर ली है?

A: नहीं, जांच जारी है और सिम कार्ड की वास्तविक मालिकाना हक़ की पुष्टि अभी हो रही है।

Q2: इस प्रकार की रिपोर्टिंग पर क्या कानूनी सुरक्षा मिलती है?

A: भारतीय न्याय प्रणाली में प्रेस की स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है, परन्तु पत्रकारों को सुरक्षा के लिए पुलिस रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ती है।