केरल के एक चिकित्सा शोधकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि सभी यात्रियों के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य और कार्यात्मक हो, क्योंकि टैक्सियों में सीट कवर के कारण सुरक्षा बेल्ट बेकार हो रहे हैं।
- डॉ. जोथिदेव केसवदेव ने याचिका दायर कर बताया कि लगभग 80-85% टैक्सियों में पिछली सीट की बेल्ट खराब या ढकी हुई होती हैं।
- आफ्टरमार्केट सीट कवर अक्सर बेल्ट सॉकेट को ढक देते हैं, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
- सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय को निर्देश दिया है कि सीट बेल्ट कानूनों का सख्ती से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
भारत में सड़क सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केरल के एक मधुमेह विशेषज्ञ और शोधकर्ता डॉ. जोथिदेव केसवदेव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका में मोटर वाहनों के सभी यात्रियों के लिए सीट बेल्ट को अनिवार्य और कार्यात्मक बनाने की मांग की गई है, क्योंकि वर्तमान में इनके उपयोग की कमी लोगों के जीवन के लिए एक बड़ा जोखिम बनी हुई है।
डॉ. केसवदेव ने पिछले दो दशकों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, अहमदाबाद और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों की यात्रा की है। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने पाया कि लगभग 80% कैब में पिछली सीटों पर सीट बेल्ट या तो काम नहीं कर रहे थे या उन्हें ढूंढ पाना असंभव था।
याचिका के अनुसार, इस समस्या का मुख्य कारण वाहनों में लगाए जाने वाले अतिरिक्त 'सीट कवर' हैं। कार मालिक मूल upholstery के ऊपर मोटे कवर लगवाते हैं, जिससे सीट बेल्ट का बकल या सॉकेट अंदर दब जाता है। कई मामलों में, ये सॉकेट समय के साथ जंग खा जाते हैं या क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह बेकार हो जाती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला भारतीय सड़क सुरक्षा की एक गंभीर सांस्कृतिक कमी को उजागर करता है: यात्री की जान से ज्यादा कार की चमक-धमक (एस्थेटिक्स) को प्राथमिकता देना। जबकि अगली सीट पर बेल्ट लगाने की जागरूकता बढ़ी है, लेकिन पिछली सीट आज भी एक 'खतरनाक क्षेत्र' बनी हुई है।
"यदि वाहनों में कार्यात्मक और सुलभ सीट-बेल्ट तंत्र नहीं हैं, तो कानून अप्रभावी हो जाता है; सुरक्षा कोई वैकल्पिक एक्सेसरी नहीं होनी चाहिए।"
डॉ. केसवदेव ने बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा उपायों और 'चाइल्ड-सीट' की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि सड़क दुर्घटनाओं में बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित होते हैं और उनके लिए उम्र और आकार के अनुसार सुरक्षा प्रणालियों का होना अनिवार्य है।
आंकड़ों की बात करें तो, 2023 में भारत में लगभग 4.80 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं और करीब 1.72 लाख मौतें दर्ज की गईं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि सीट बेल्ट का सख्ती से पालन किया जाए, तो इनमें से कई मौतों को रोका जा सकता था, ठीक वैसे ही जैसे हेलमेट कानून को अनिवार्य बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह कानून का आवश्यक कार्यान्वयन सुनिश्चित करे और राज्य सरकारें इसे लागू करें। डॉ. केसवदेव ने टैक्सी ऑपरेटरों से अपील की है कि वे सीट कवर लगाते समय बेल्ट सॉकेट के लिए पर्याप्त जगह छोड़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारतीय टैक्सियों में पिछली सीट बेल्ट अक्सर काम क्यों नहीं करतीं?
इसका मुख्य कारण बाहरी सीट कवर हैं, जो बेल्ट के सॉकेट को पूरी तरह ढक देते हैं, जिससे यात्री उसे लगा नहीं पाते।
प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कोर्ट ने मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह सीट बेल्ट कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करे और राज्यों को इसे सख्ती से लागू करने को कहा है।