ओडिशा सतर्कता विभाग ने दो ऑडिटर्स को सरकारी आवासीय स्कूलों के खातों में विसंगतियों को छिपाने के बदले प्रति छात्र 10 रुपये की रिश्वत मांगते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। इस छापेमारी में कुल 14.38 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई है।
- दो सरकारी ऑडिटर्स को ₹14,38,340 की नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया।
- प्रति छात्र ₹10 की रिश्वत मांगकर ऑडिट रिपोर्ट को 'क्लीन' करने का खेल चल रहा था।
- सतर्कता विभाग अब आरोपियों की बेनामी संपत्तियों की जांच कर रहा है।
ओडिशा के मयूरभंज जिले में भ्रष्टाचार का एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) विकास विभाग के दो ऑडिटर्स ने सरकारी आवासीय स्कूलों के ऑडिट के दौरान एक ऐसा फॉर्मूला अपनाया, जिसने सबको हैरान कर दिया। इन अधिकारियों ने स्कूल के प्रधानाध्यापकों और छात्रावास प्रभारियों से मांग की थी कि वे प्रति नामांकित छात्र 10 रुपये की रिश्वत दें, ताकि उनके खातों की गड़बड़ियों को नजरअंदाज कर रिपोर्ट को सही दिखाया जा सके।
घटनाक्रम के अनुसार, सतर्कता विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि बारीपदा में तैनात ये ऑडिटर्स बड़े पैमाने पर वसूली कर रहे हैं। 10 सितंबर, 2026 की रात को जब ये दोनों अधिकारी बारीपदा के जिला कल्याण अधिकारी (DWO) कार्यालय से अपने होटल की ओर जा रहे थे, तब सतर्कता विभाग ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया।
तलाशी के दौरान, अधिकारियों को उनके पास 52 लिफाफों और 20 खुले बंडलों में ₹5,51,510 की संदिग्ध नकदी मिली। इसके बाद जब उनके होटल के कमरों की तलाशी ली गई, तो वहां से ₹8,86,830 और बरामद हुए। इस प्रकार कुल ₹14,38,340 की राशि जब्त की गई, जिसका कोई कानूनी हिसाब अधिकारी नहीं दे सके।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this case highlights a systemic failure in the oversight of educational funds meant for marginalized communities. When auditors—the very people meant to ensure transparency—become the agents of corruption, it directly impacts the quality of education and facilities provided to SC/ST students in residential schools.
"This 'per-student' bribery model indicates a calculated and organized approach to corruption, where the bribe is scaled based on the size of the institution."
ये ऑडिटर्स 30 अगस्त, 2026 से बारीपदा में तैनात थे। उन्होंने कई स्कूलों के हेडमास्टरों को फाइलों और रजिस्टरों के साथ जिला मुख्यालय बुलाकर यह अवैध मांग की थी। अब इस मामले को 'आय से अधिक संपत्ति' (Disproportionate Assets) के मामले में बदल दिया गया है। सतर्कता विभाग अब उनके घरों और कार्यालयों पर छापेमारी कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक कुल कितनी संपत्ति अर्जित की है।
Frequently Asked Questions
1. ऑडिटर्स ने कितनी रिश्वत मांगी थी?
ऑडिटर्स ने सरकारी आवासीय स्कूलों के खातों की गड़बड़ियों को ठीक करने के बदले प्रति नामांकित छात्र 10 रुपये की मांग की थी।
सतर्कता विभाग ने होटल और व्यक्तिगत तलाशी के दौरान कुल ₹14,38,340 की नकदी जब्त की है।