आंध्र प्रदेश के डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता ने घोषणा की है कि अमरावती के पास थुलूर में बन रही ₹253 करोड़ की अत्याधुनिक फॉरेंसिक लैब जनवरी 2027 तक शुरू हो जाएगी। यह लैब देश की दूसरी सबसे बड़ी प्रयोगशाला होगी।

  • ₹253 करोड़ की लागत से थुलूर में अत्याधुनिक APSFL मुख्यालय का निर्माण।
  • यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी फॉरेंसिक प्रयोगशाला होगी।
  • DNA प्रोफाइलिंग का समय 13 दिनों से घटकर केवल एक सप्ताह रह गया है।
  • राजमहेंद्रवरम में ₹11 करोड़ की क्षेत्रीय लैब का उद्घाटन किया गया।

आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) हरीश कुमार गुप्ता ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि अमरावती के पास थुलूर में निर्माणाधीन आंध्र प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक लेबोरेटरी (APSFL) का मुख्यालय जनवरी 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगा। वर्तमान में इस परियोजना का 80% कार्य पूरा हो चुका है और यह ₹253 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बनाई जा रही है।

डीजीपी ने राजमहेंद्रवरम में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि यह केंद्र न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी प्रयोगशाला होगी, जिसमें DNA प्रोफाइलिंग, टॉक्सिकोलॉजी (विष विज्ञान), नार्कोटिक विश्लेषण और विशेष रूप से साइबर फॉरेंसिक के लिए समर्पित अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी।

तकनीकी प्रगति और दक्षता

जांच प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए APSFL ने अभूतपूर्व सुधार किए हैं। डीजीपी के अनुसार, DNA प्रोफाइलिंग की अवधि को 13 दिनों से घटाकर अब केवल एक सप्ताह कर दिया गया है। विशेष रूप से गंभीर मामलों के लिए, टर्नअराउंड समय को मात्र 12 घंटे तक सीमित कर दिया गया है, जिसमें 97% सटीकता का दावा किया गया है।

आंध्र प्रदेश फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति ला रहा है, जिससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी।

साइबर अपराधों से निपटने के लिए, राज्य के सभी सात फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं को उन्नत साइबर फॉरेंसिक उपकरण दिए जाएंगे, जबकि मुख्य 'साइबर वॉर रूम' APSFL मुख्यालय में संचालित होगा।

राजमहेंद्रवरम क्षेत्रीय लैब का विस्तार

राजमहेंद्रवरम में ₹11 करोड़ की लागत से निर्मित क्षेत्रीय फॉरेंसिक लैब का उद्घाटन भी किया गया। इस लैब के माध्यम से काकिनाडा, डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी और पोलावरम जिलों के मामलों की जांच की जाएगी। आगामी एक महीने के भीतर इस लैब में कम से कम 70 कर्मियों की भर्ती की जाएगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि फॉरेंसिक बुनियादी ढांचे में यह निवेश न केवल अपराध दर को नियंत्रित करने में मदद करेगा, बल्कि साक्ष्यों की वैज्ञानिक सटीकता बढ़ाकर न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास भी मजबूत करेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पारंपरिक रूप से, फॉरेंसिक जांच में लगने वाला समय न्याय मिलने में देरी का एक बड़ा कारण रहा है। भारत में राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण पिछले कुछ वर्षों में एक प्राथमिकता बना है ताकि डिजिटल और जैविक साक्ष्यों के बढ़ते जटिल स्वरूप से निपटा जा सके।

Did You Know?: DNA प्रोफाइलिंग की सटीकता अब 97% तक पहुंच गई है, जो वैज्ञानिक जांच में एक नया मानक स्थापित करती है।

Frequently Asked Questions

1. APSFL मुख्यालय कहाँ स्थित है?
यह आंध्र प्रदेश के थुलूर (अमरावती के पास) में स्थित है।

2. राजमहेंद्रवरम लैब किन जिलों की सेवा करेगी?
यह काकिनाडा, डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी और पोलावरम जिलों के मामलों को संभालेगी।