हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक ज्योतिषी को जमानत दी, जिस पर महिला ने झूठे विवाह वादे के आधार पर यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि दोनों पहले से विवाहित थे और कोई विवाह का वादा नहीं था।
- हिमाचल उच्च न्यायालय ने आरोपी को जमानत दी।
- महिला ने झूठे विवाह वादे के आधार पर यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया।
- कोर्ट ने कहा दोनों पहले से विवाहित थे, इसलिए ‘विवाह का वादा’ अपराध नहीं बनता।
नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक 31 वर्षीय ज्योतिषी को जमानत प्रदान की, जिस पर महिला ने झूठे विवाह वादे के आधार पर यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। दोनों पक्ष पहले से ही अन्य व्यक्तियों से विवाहित थे और एक‑दूसरे के वैवाहिक स्थिति से अवगत थे।
मामले की पृष्ठभूमि
महिला ने बताया कि आरोपी ने उसे अपना कुंडली पढ़ने के बाद तलाक की सलाह दी और कहा कि वह उसके साथ विवाह करेगा। बाद में वह आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बना, जबकि वह स्वयं भी विवाहित थी। आरोपी ने कई अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध बनाए हुए थे।
उच्च न्यायालय का निरीक्षण
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपने‑अपने वैवाहिक बंधन को नहीं तोड़ा था, इसलिए ‘विवाह का वादा’ बनाना असंभव था। उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन के आरोप अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं, इसलिए trial के दौरान अनिश्चितकालीन जेल नहीं दी जा सकती।
"यह मामला रिश्तों की जटिलताओं और कानूनी दायित्वों की समझ को उजागर करता है।"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that इस निर्णय से भविष्य में समान मामलों में ‘विवाह के वादे’ के आधार पर अपराध स्थापित करने की सीमा स्पष्ट होगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी।
Frequently Asked Questions
- क्या आरोपी को जमानत मिली है?
- कोर्ट ने ‘विवाह का वादा’ को अपराध क्यों नहीं माना?
कोर्ट ने आरोपी को व्यक्तिगत बंधक के साथ दो स्थानीय जमानतदारों के माध्यम से जमानत दी और उसे परीक्षण में नियमित रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया।