इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जिला और सत्र न्यायालय परिसर से सभी शेष अवैध अतिक्रमणों को 5 सप्ताह के भीतर हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने और समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 5 सप्ताह की समय सीमा तय की है।
- न्यायालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।
- अधिकारियों को पूर्व में निर्धारित सुरक्षा उपायों और दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
- पुलिस और जिला प्रशासन को नगर निगम का सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लखनऊ जिला और सत्र न्यायालय परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों से सभी शेष अवैध अतिक्रमणों को पांच सप्ताह के भीतर हटा दें। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने शुक्रवार को अतिक्रमण से संबंधित दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
कार्रवाई का अब तक का विवरण
अदालत ने सुनवाई के दौरान उल्लेख किया कि पिछले आदेशों के अनुपालन में अब तक 14 अवैध संरचनाओं को हटाया गया था, जिसके बाद 57 और अतिक्रमणों को साफ किया गया है। लखनऊ नगर निगम के ज़ोन-1 के ज़ोनल अधिकारी ने 8 सितंबर को एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें हटाए गए ढांचों की तस्वीरें भी शामिल थीं। हालांकि, बेंच ने पाया कि यह अभियान अभी भी अधूरा है और इसे पूर्ण करने की आवश्यकता है।
सुरक्षा उपाय और कानूनी प्रक्रिया
अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान के दौरान 4 अगस्त के आदेश में दिए गए सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। आदेश के तहत, शेष 72 अतिक्रमणकारियों को अपने चैंबर या दुकानों को खाली करने या अपने कब्जे का कानूनी आधार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया जाएगा। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो अधिकारियों को अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने का अधिकार होगा।
न्यायिक कार्य में बाधा न आए, इसके लिए अदालत ने रविवार को भी ध्वस्तीकरण अभियान चलाने की अनुमति दी है।
प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता
अदालत ने पुलिस कमिश्नर, जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे नगर निगम अधिकारियों को इस अभियान के दौरान पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस सहायता प्रदान करने के लिए मिलकर काम करें। यदि नोटिस व्यक्तिगत रूप से नहीं दिए जा सकते हैं, तो उन्हें एक हिंदी और एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित किया जाना चाहिए, जिससे प्रभावित व्यक्तियों को जवाब देने के लिए कम से कम 10 दिन का समय मिले।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
लखनऊ के न्यायालय परिसर में अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से एक चुनौती रही है, जिससे न केवल न्यायिक कार्यों में बाधा आती है बल्कि वकीलों और मुवक्किलों के आवागमन में भी कठिनाई होती है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से शहर के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जों के खिलाफ एक कड़ा संदेश गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह आदेश न केवल न्यायिक बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहरी नियोजन और कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Frequently Asked Questions
1. हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के लिए कितना समय दिया है?
कोर्ट ने अधिकारियों को 5 सप्ताह के भीतर सभी शेष अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है।
2. क्या अतिक्रमणकारियों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा?
हाँ, अदालत ने निर्देश दिया है कि अतिक्रमणकारियों को अपना पक्ष रखने या कानूनी आधार दिखाने के लिए अंतिम अवसर दिया जाए।