अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ एक ऐतिहासिक जीत में, पंजाब पुलिस ने मोल्दोवा से अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम का प्रत्यर्पण कराया है। जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़े इस अपराधी पर हत्या और यूएपीए (UAPA) सहित 21 मामले दर्ज हैं।

  • पंजाब पुलिस द्वारा यूरोपीय देश (मोल्दोवा) से किसी भगोड़े का पहला सफल प्रत्यर्पण।
  • आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम, कुख्यात जग्गू भगवानपुरिया गैंग का मुख्य गुर्गा है।
  • हत्या, जबरन वसूली और यूएपीए (UAPA) सहित कुल 21 आपराधिक मामलों में वांछित।
  • 'ऑपरेशन ईस्टर्न रीच' के तहत छह महीने तक अंतरराष्ट्रीय खुफिया निगरानी चलाई गई।

भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि में, पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद से मोल्दोवा गणराज्य से अमृतपाल सिंह, जिसे अमृत दलम के नाम से जाना जाता है, का सफलतापूर्वक प्रत्यर्पण कराया है। यह पहली बार है जब पंजाब पुलिस ने किसी यूरोपीय देश से किसी वांछित अपराधी को वापस लाने में सफलता हासिल की है, जो विदेशी धरती से संचालित संगठित अपराध के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।

अमृत दलम जग्गू भगवानपुरिया गैंग का एक प्रमुख सदस्य है और आरोप है कि वह विदेश में गैंगस्टर हैरी चत्था के साथ मिलकर काम कर रहा था। पंजाब में उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, मादक पदार्थों की तस्करी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित 21 मामले दर्ज हैं। वह विशेष रूप से होशियारपुर के बुल्लोवाल पुलिस स्टेशन में दर्ज एक दोहरे हत्याकांड में शामिल रहा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रत्यर्पण केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस 'रिमोट-कंट्रोल' क्राइम मॉडल पर एक रणनीतिक प्रहार है, जहाँ गैंगस्टर यूरोप और मध्य पूर्व में सुरक्षित ठिकानों से भारत में अपराध संचालित करते हैं। मोल्दोवा और अजरबैजान के कानूनी ढांचे का सफलतापूर्वक उपयोग करके, पंजाब पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि अब यूरोपीय सीमाएं भारतीय भगोड़ों के लिए अभेद्य ढाल नहीं हैं।

दलम की गतिविधियों से पता चलता है कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए बेहद शातिर था। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, वह पहले यूएई (UAE) में था और बाद में अपना आधार मोल्दोवा में स्थानांतरित कर लिया। हाल ही में उसने प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टर गोरा बरियार की हत्या में अपनी भूमिका का दावा किया था, जिससे क्षेत्र में गैंगवार और तेज हो गया था।

"ऑपरेशन ईस्टर्न रीच की सफलता यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निरंतर खुफिया निगरानी से सबसे सुरक्षित विदेशी ठिकानों को भी ध्वस्त किया जा सकता है।"

इस पूरे मिशन को 'ऑपरेशन ईस्टर्न रीच' नाम दिया गया था। पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने इस सफलता का श्रेय एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्रैडिशन सेल (OFTEC) को दिया। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, सीबीआई (CBI) और मोल्दोवा व अजरबैजान के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मामले की श्रेणी मामलों की संख्या प्रमुख स्थान
हत्या 5 होशियारपुर, बटाला
आर्म्स एक्ट 9 गुरदासपुर, अमृतसर
UAPA/विस्फोटक 1 स्टेट स्पेशल सेल
NDPS/जबरन वसूली 6 लुधियाना, होशियारपुर
क्या आप जानते हैं?: मोल्दोवा पूर्वी यूरोप का एक लैंडलॉक देश है, जो हाल के वर्षों में एशिया से भागने वाले अपराधियों की ट्रैकिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र बना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: ऑपरेशन ईस्टर्न रीच क्या है?
यह पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा चलाया गया छह महीने का एक खुफिया अंतरराष्ट्रीय अभियान था, जिसका उद्देश्य अमृतपाल सिंह को यूरोप से प्रत्यर्पित करना था।

प्रश्न 2: अमृत दलम किस गैंग से जुड़ा है?
वह जग्गू भगवानपुरिया गैंग का मुख्य सदस्य है और बम्बीहा व लकी पटियाल जैसे प्रतिद्वंद्वी गैंग्स का दुश्मन है।