मुजफ्फरपुर की एक अदालत ने 2018 के एक पुराने मामले में गवाही देने में विफल रहने पर नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने पुलिस प्रशासन को इन गवाहों को पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।
- मुजफ्फरपुर की अदालत ने 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया।
- मामला 2018 का है, जिसमें डकैती की तैयारी के आरोप में छह लोग पकड़े गए थे।
- पुलिसकर्मी बार-बार समन मिलने के बावजूद अदालत में गवाही देने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
- अदालत ने मुजफ्फरपुर एसएसपी और सरैया थाना प्रभारी को गवाहों को पेश करने का निर्देश दिया है।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ एक स्थानीय अदालत ने कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह मामला साल 2018 का है, जो पिछले आठ वर्षों से अदालत की दहलीज पर लंबित है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11, डॉ. किशोर कुणाल ने 10 सितंबर को यह आदेश पारित किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के रूप में नामित पुलिसकर्मी बार-बार बुलाए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए सरैया थाना प्रभारी और मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को आदेश दिया है कि वे इन गवाहों को अगली सुनवाई के दौरान अनिवार्य रूप से अदालत के समक्ष पेश करें।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद 17 सितंबर, 2018 की रात का है। उस समय सरैया पुलिस ने भगत सिंह हाई स्कूल के मैदान में छापेमारी की थी। पुलिस का आरोप था कि सात से आठ अपराधी हथियारबंद होकर डकैती की योजना बना रहे थे। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने छह लोगों को पकड़ा था और उनके पास से अवैध देसी पिस्तौल और कारतूस बरामद किए गए थे।
पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 399, 402, 34 और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि, इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग के ही कई अधिकारी गवाही देने के लिए अनुपस्थित रहे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में देरी हुई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब कानून लागू करने वाली संस्थाएं ही न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करने में विफल रहती हैं, तो इससे न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं। पुलिसकर्मियों द्वारा गवाह के रूप में उपस्थित न होना न केवल मामले को लंबा खींचता है, बल्कि अपराधियों को कानून की खामियों का फायदा उठाने का मौका भी देता है।
न्यायिक प्रक्रिया में पुलिस की अनुपस्थिति कानून के शासन (Rule of Law) के लिए एक गंभीर चुनौती है।
वारंट जारी किए गए पुलिसकर्मियों में उप-निरीक्षक (Sub-Inspectors) मोहम्मद अल्लाउद्दीन, सत्त्रुधन शर्मा, योगेंद्र कुमार सिंह, बीएमपी हवलदार संजय शर्मा, कांस्टेबल अभय कुमार सिंह, अझार खान, राहुल कुमार, ड्राइवर राधाकांत प्रसाद और जांच अधिकारी अनिल कुमार शामिल हैं।
Frequently Asked Questions
1. अदालत ने वारंट क्यों जारी किया?
पुलिसकर्मी 2018 के मामले में गवाही देने के लिए बार-बार बुलाए जाने के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे।
2. अगला मामला कब सुनवाई के लिए है?
मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को अभियोजन साक्ष्यों के लिए निर्धारित की गई है।