जी एन साइबाबा की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम से जुड़े मामले में मुंबई पुलिस ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के एक और पूर्व छात्र को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई एक साल पुराने एफआईआर के सिलसिले में की गई है।
- मुंबई पुलिस ने टीआईएसएस के एक पूर्व छात्र को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है।
- यह मामला 2025 में जी एन साइबाबा की पुण्यतिथि पर आयोजित एक सभा से संबंधित है।
- अदालत ने पहले ही एक छात्र को जमानत दे दी है, जिसमें माओवादी विचारधारा से संबंध होने के सबूत नहीं मिले थे।
मुंबई में जी एन साइबाबा की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक सभा से जुड़े मामले में कानूनी शिकंजा और कसता जा रहा है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के एक और पूर्व छात्र को मुंबई पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस एफआईआर के संदर्भ में दिया गया है जो लगभग एक साल पहले दर्ज की गई थी।
बता दें कि यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 35 (3) के तहत जारी किया गया है। पुलिस ने इस छात्र को जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस व्यक्ति का नाम शुरुआती एफआईआर में शामिल नहीं था, लेकिन जांच के दौरान अब इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद अक्टूबर 2025 में टीआईएसएस के देओनार परिसर में आयोजित एक सभा से शुरू हुआ था। ट्रॉम्बे पुलिस ने संस्थान के एक एसोसिएट डीन की शिकायत पर नौ छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि छात्रों ने बिना अनुमति के साइबाबा को श्रद्धांजलि देने के लिए सभा की थी। जी एन साइबाबा, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर थे, को 2017 में माओवादी होने के आरोप में दोषी ठहराया गया था, हालांकि 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।
अक्टूबर 2025 की उस घटना के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया था कि छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे लगाए थे और उनके पास माओवादी विचारधारा से जुड़ी पुस्तकें और सामग्री भी मिली थी।
कानूनी मोड़ और अदालती रुख
इस मामले में हाल ही में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एक 30 वर्षीय पूर्व छात्र को जमानत दे दी। अदालत ने टिप्पणी की कि पुलिस के उन आरोपों को पुष्ट करने के लिए कोई ठोस सामग्री नहीं है जो छात्र को माओवादी या राष्ट्रविरोधी मानसिकता से जोड़ती हो। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा पिछले महीने दूसरे छात्र को दी गई अंतरिम राहत का भी हवाला दिया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच का यह संघर्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की धुंधली रेखा को दर्शाता है। टीआईएसएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का नाम इस मामले में आना अकादमिक स्वायत्तता पर भी सवाल खड़े करता है।
कानूनी प्रक्रिया की जटिलता और छात्रों पर लगे वैचारिक आरोप इस मामले को केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक विमर्श बना देते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मुंबई पुलिस ने नोटिस क्यों जारी किया है?
उत्तर: पुलिस ने 2025 के टीआईएसएस कार्यक्रम से जुड़ी जांच को आगे बढ़ाने और संदिग्धों की पहचान करने के लिए यह नोटिस जारी किया है।
प्रश्न 2: क्या छात्रों पर माओवादी होने के आरोप सिद्ध हुए हैं?
उत्तर: अब तक की अदालती कार्यवाही में, कोर्ट ने माना है कि छात्रों को माओवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।