सूरत के एक बहु-करोड़ रुपये के हीरा धोखाधड़ी मामले में आरोपी हरि रावल को गुजरात उच्च न्यायालय ने जमानत की शेष राशि जमा करने के लिए 30 दिनों की मोहलत दी है। आरोपी ने तर्क दिया कि जेल में रहने के कारण उसका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया है।
- सूरत के ₹4.80 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय हीरा धोखाधड़ी मामले में आरोपी को मिला 30 दिन का अतिरिक्त समय।
- आरोपी ने बताया कि जेल में रहने के कारण उसका हीरा व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया है।
- न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अंतिम विस्तार है और इसके बाद कोई और मोहलत नहीं दी जाएगी।
गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत के एक व्यक्ति, जो ₹4.80 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय हीरा धोखाधड़ी मामले में आरोपी है, को उसकी जमानत की शेष राशि जमा करने के लिए एक महीने का विस्तार दिया है। आरोपी, हरिकृष्णा उर्फ हरि कमलेशभाई रावल, ने अदालत से गुहार लगाई कि लंबी कैद के कारण उसका हीरा व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे उसके लिए समय पर पूरी राशि जुटाना असंभव हो गया है।
मामले की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी
रावल को 25 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिकी खरीदारों के फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल और वर्चुअल फोन नंबरों का उपयोग करके स्थानीय हीरा व्यापारियों को धोखा दिया। यह घोटाला तब सामने आया जब व्यापारियों ने उच्च मूल्य वाले हीरे दुबई और बैंकॉक भेज दिए, लेकिन बदले में कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते जोखिमों को उजागर करता है, जहाँ अपराधी विश्वसनीय व्यापारिक मंचों का दुरुपयोग करते हैं। RapNet (अब Rapaport Trade) जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफार्मों का उपयोग करके, अपराधियों ने व्यापारियों के बीच विश्वास पैदा किया, जिससे यह वैश्विक स्तर पर एक बड़ा वित्तीय अपराध बन गया।
डिजिटल पहचान की चोरी और वर्चुअल नंबरों का दुरुपयोग अब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक धोखाधड़ी का एक नया और खतरनाक हथियार बन गया है।
जुलाई में, उच्च न्यायालय ने रावल को नियमित जमानत दी थी, बशर्ते वह 10 लाख रुपये की राशि जमा करे। हालांकि, रावल ने केवल 5 लाख रुपये ही जुटा पाए। न्यायमूर्ति हसमुख डी सुथार ने मामले के "अजीब तथ्यों" को देखते हुए शेष 5 लाख रुपये के लिए अंतिम एक महीने की समय सीमा प्रदान की है।
धोखाधड़ी का तरीका: एक विश्लेषण
शिकायतकर्ता, संजयभाई जाधवभाई गोटी (निलकंठ सॉलिटेयर के प्रोप्राइटर), के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी प्रोफाइल बनाकर विश्वास हासिल किया।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| धोखाधड़ी की राशि | ₹4.80 करोड़ |
| धोखाधड़ी का तरीका | फर्जी प्रोफाइल और वर्चुअल नंबर |
| प्रभावित क्षेत्र | सूरत, दुबई, बैंकॉक |
| प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग | RapNet (Rapaport Trade) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: आरोपी को और अधिक समय क्यों दिया गया?
उत्तर: आरोपी का तर्क था कि जेल में रहने के कारण उसका व्यवसाय बंद हो गया है, जिससे वह आर्थिक रूप से असमर्थ हो गया है।
प्रश्न 2: क्या यह अंतिम विस्तार है?
उत्तर: हाँ, अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इसके बाद कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा।