गुजरात उच्च न्यायालय ने 67 वर्षीय पुरुष को तलाक दिया, जब उसने पाया कि पत्नी 1992 से घर से गायब है। अदालत ने रख-रखाव 12,000₹ से बढ़ाकर 20,000₹ कर दिया और पत्नी को पेंशन पर निर्भर रहने दिया।
- 67 वर्षीय पुरुष को 1992 से अलग रहने के बाद तलाक मिला।
- पत्नी 1992 में भाई के जन्मदिन पर घर छोड़ गई और कभी वापस नहीं आई।
- न्यायालय ने पेंशन पर निर्भर पत्नी के लिए रख-रखाव 12,000₹ से बढ़ाकर 20,000₹ कर दिया।
गुजरात उच्च न्यायालय ने 67 वर्षीय पुरुष को तलाक दिया, जब उसने पाया कि पत्नी 1992 से घर से गायब है।
दोनों 1989 में विवाहित हुए और दो बेटों के पिता थे।
पत्नी ने 1992 में अपने भाई के जन्मदिन के लिए घर छोड़ा और तब से वह लौटने की कोई कोशिश नहीं की।
पहले परिवार न्यायालय ने 2015 में तलाक के दावे को अस्वीकार किया, यह कहते हुए कि पति ने कोई दुरुपयोग या परित्याग सिद्ध नहीं किया।
उच्च न्यायालय ने पाया कि पति ने साबित किया कि पत्नी बिना किसी वैध कारण के अलग रही है, और इस प्रकार परित्याग का आधार बना।
न्यायालय ने पेंशन पर निर्भर पत्नी के लिए रख-रखाव 12,000₹ से बढ़ाकर 20,000₹ किया।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय कानून में परित्याग का मामला लंबी अवधि के अलगाव पर आधारित हो सकता है।
पति ने सहमति दी कि पत्नी अभी भी उसकी पेंशन और अन्य लाभों की एकमात्र नामित होगी।
Why This Matters
यह मामला दिखाता है कि परित्याग का आधार स्थापित करने के लिए लंबी अवधि का अलगाव पर्याप्त हो सकता है, और यह निर्णय भविष्य में समान मामलों के लिए मिसाल कायम कर सकता है।
"परित्याग के मामलों में अदालतों को साक्ष्य की सटीकता पर भरोसा करना चाहिए, अन्यथा वैवाहिक अधिकारों की अनदेखी हो सकती है," कहते हैं कानूनी विश्लेषक डॉ. अंजलि शुक्ला।
Frequently Asked Questions
Q1: परित्याग को साबित करने के लिए क्या साक्ष्य आवश्यक हैं?
परित्याग साबित करने के लिए लगातार 5 वर्ष का अलगाव, पति द्वारा किसी भी दुरुपयोग या भेदभाव का प्रमाण, और पत्नी की ओर से वैध कारण की अनुपस्थिति आवश्यक है।
Q2: क्या तलाक के बाद रख-रखाव (अलिमनी) में वृद्धि संभव है?
हाँ, यदि अदालत मानती है कि पत्नी की आर्थिक स्थिति बदल गई है या वह निर्भर है, तो रख-रखाव में वृद्धि की जा सकती है।