मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही देने की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने लंदन में रहने वाले एक 72 वर्षीय डॉक्टर को संपत्ति विवाद मामले में वर्चुअल क्रॉस-एग्जामिनेशन की अनुमति दे दी है।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से गवाही देने की अनुमति को वैध ठहराया है।
- 72 वर्षीय लंदन स्थित डॉक्टर को स्वास्थ्य कारणों से वर्चुअल क्रॉस-एग्जामिनेशन की अनुमति मिली।
- अदालत ने ट्रायल कोर्ट को चार महीने के भीतर मामले को निपटाने का निर्देश दिया है।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जटिल दस्तावेजों के आधार पर गवाह की शारीरिक उपस्थिति की मांग नहीं की जा सकती।
मद्रास उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि संपत्ति विवादों में जटिल दस्तावेजों की उपस्थिति का उपयोग गवाहों को ऑनलाइन गवाही देने से रोकने के लिए नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश की पीठ ने एक लंबे समय से लंबित संपत्ति मामले में लंदन में रहने वाले 72 वर्षीय डॉक्टर को वर्चुअल माध्यम से साक्ष्य देने की अनुमति प्रदान की है।
यह मामला डॉ. के बालसुंदरम द्वारा दायर एक संपत्ति विभाजन मामले से संबंधित है। डॉक्टर ने कोयंबटूर की जिला मुंसिफ अदालत द्वारा 2004 में पारित एक डिक्री को चुनौती दी थी। डॉक्टर ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें स्वास्थ्य कारणों से वर्चुअल मोड में गवाही देने की अनुमति दी जाए, क्योंकि हाल ही में उनकी बायपास सर्जरी हुई थी और उन्हें लंबी यात्रा न करने की सलाह दी गई थी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह निर्णय भारत की न्यायिक प्रक्रिया के आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह निर्णय न केवल बुजुर्ग गवाहों के लिए राहत प्रदान करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि भौगोलिक दूरी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं न्याय की प्रक्रिया में बाधा न बनें। यह 'मद्रास उच्च न्यायालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2026' के प्रभावी कार्यान्वयन को भी दर्शाता है।
न्यायिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण न्याय में देरी को कम करने और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।
सुनवाई के दौरान, विपक्षी पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया था कि जटिल दस्तावेजों और कंपनियों के विभाजन के कारण डॉक्टर की शारीरिक उपस्थिति आवश्यक है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यदि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दिशानिर्देशों का पालन किया जाए, तो क्रॉस-एग्जामिनेशन को आसानी से और कुशलता से संचालित किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति वेंकटेश ने टिप्पणी की कि यह आश्चर्यजनक है कि विपक्षी पक्ष डॉक्टर की शारीरिक उपस्थिति पर इतना जोर दे रहे थे, जबकि डॉक्टर पहले भी तीन बार भारत आकर अदालत में उपस्थित हो चुके थे, लेकिन उस समय उनका क्रॉस-एग्जामिनेशन नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक ट्रायल कोर्ट को वर्चुअल मोड में कठिनाई न हो, तब तक शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।
Frequently Asked Questions
1. क्या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दी गई गवाही कानूनी रूप से मान्य है?
हाँ, मद्रास उच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार, यदि उचित दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है, तो VC मोड के माध्यम से साक्ष्य रिकॉर्ड करना पूरी तरह वैध है।
2. अदालत ने इस मामले में क्या विशेष निर्देश दिए?
अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की सुनवाई को अगले चार महीनों के भीतर पूरा करे।