दिल्ली के ₹700 करोड़ के चिकित्सा आपूर्ति घोटाले की मुख्य आरोपी डॉ. वत्सला अग्रवाल को अदालत ने स्वास्थ्य कारणों के आधार पर अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीमारी का इलाज जेल के भीतर संभव है।
- दिल्ली की पूर्व DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल की अंतरिम जमानत याचिका खारिज।
- ₹700 करोड़ के मेडिकल सप्लाई घोटाले में मुख्य आरोपी हैं डॉ. अग्रवाल।
- अदालत ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज जेल परिसर के भीतर किया जा सकता है।
- जेल अधीक्षक को आरोपी के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
नई दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सोमवार को ₹700 करोड़ के कथित चिकित्सा आपूर्ति खरीद घोटाले की मुख्य आरोपी और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DGHS) की पूर्व प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया। डॉ. अग्रवाल ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपनी अंतरिम जमानत को छह सप्ताह के लिए बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
हाउस एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने अपने आदेश में कहा कि डिस्चार्ज समरी की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने पर यह स्पष्ट होता है कि आरोपी किसी भी जानलेवा बीमारी से पीड़ित नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि उनकी वर्तमान स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज जेल परिसर के भीतर ही किया जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला कानूनी मिसाल कायम करता है कि स्वास्थ्य संबंधी आधार पर जमानत केवल तभी दी जा सकती है जब बीमारी का इलाज जेल में संभव न हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'इम्यूनो-कॉम्प्रोमाइज्ड' (कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली) होने के आधार पर भीड़भाड़ से बचने का तर्क जेल की परिस्थितियों में मान्य नहीं है, क्योंकि जेल प्रशासन को उचित सावधानी बरतने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा सहायता की कमी जमानत का आधार नहीं हो सकती, क्योंकि राज्य की जिम्मेदारी जेल में उपचार सुनिश्चित करना है।
डॉ. अग्रवाल के वकील ने तर्क दिया था कि उन्हें भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचने की सलाह दी गई है, जो जेल की बैरक में संभव नहीं है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे डॉ. अग्रवाल के लिए सर्वो वेंटिलेशन और नाइट्रोजन ऑक्सीजन थेरेपी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं जेल के भीतर ही सुनिश्चित करें। यदि यह संभव न हो, तो उन्हें तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाया जाए।
घोटाले की पृष्ठभूमि
यह मामला जून में दर्ज की गई एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें चिकित्सा आपूर्ति, दवाओं और सर्जिकल उपकरणों की खरीद में भारी अनियमितताओं और सार्वजनिक धन के गबन का आरोप है। इस घोटाले में डॉ. अग्रवाल के साथ पूर्व सीपीए (CPA) उप नियंत्रक नीरज चोपड़ा और पूर्व कार्यालय प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा भी शामिल हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: डॉ. वत्सला अग्रवाल पर क्या आरोप हैं?
उत्तर: उन पर ₹700 करोड़ के चिकित्सा आपूर्ति खरीद घोटाले में शामिल होने और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है।
प्रश्न 2: अदालत ने जेल प्रशासन को क्या निर्देश दिए हैं?
उत्तर: अदालत ने जेल अधीक्षक को आरोपी के लिए जेल के भीतर ही आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और ऑक्सीजन थेरेपी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।